वोटर लिस्ट विवाद: सपा सांसद इकरा हसन ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार से मांगा इस्तीफा
लखनऊ में समाजवादी पार्टी की सांसद इकरा हसन ने केंद्र सरकार और चुनाव आयोग के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। इकरा हसन ने वोटर लिस्ट में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी का आरोप लगाते हुए मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के तत्काल इस्तीफे की मांग की है। उन्होंने सत्तारूढ़ भाजपा सरकार पर देश को लूटने का गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि सरकार राष्ट्र के युवाओं के भविष्य की कीमत पर एक व्यक्ति को बचाने में जुटी है।
इकरा हसन ने सवाल उठाया कि आखिर प्रशासन युवाओं को इस कदर मानसिक तनाव और परेशानी में क्यों डाल रहा है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि एक संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति को अब इस्तीफा दे देना चाहिए। सांसद ने आगे कहा कि विपक्ष का यह प्राथमिक कर्तव्य है कि वह देश के ज्वलंत मुद्दों को मजबूती से उठाए, जबकि सत्ता पक्ष अपने शासन के अहंकार में डूबा हुआ है।
वोटर लिस्ट में 13 करोड़ नामों को हटाने का आरोप
यह पूरा विवाद अक्टूबर 2026 की शुरुआत से शुरू हुए विरोध प्रदर्शनों से जुड़ा है। इंडिया गठबंधन और विभिन्न युवा संगठनों का आरोप है कि 'स्पेशल इंटेंसिव रिविजन' (SIR) के दौरान करीब 13 करोड़ मतदाताओं के नाम वोटर लिस्ट से हटा दिए गए हैं। हालांकि, भारत निर्वाचन आयोग ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि रिविजन से जुड़े सभी फैसले तीन सदस्यीय आयोग द्वारा सर्वसम्मति से लिए गए थे।
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार, जो 1988 बैच के आईएएस अधिकारी रहे हैं और 19 फरवरी 2025 को पदभार संभाला था, इस समय विवादों के केंद्र में हैं। चर्चा है कि चुनाव आयोग के भीतर आंतरिक मतभेद चल रहे हैं। गौर करने वाली बात यह है कि 23 सितंबर 2026 के बाद से ज्ञानेश कुमार ने कोई सार्वजनिक बयान नहीं दिया है और न ही वे नजर आए हैं, जिससे दिल्ली और मुंबई जैसे शहरों में हो रहे प्रदर्शनों के बीच अटकलें और बढ़ गई हैं।
इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने अब तक मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ किसी अंतरिम निलंबन के आदेश देने से इनकार कर दिया है, क्योंकि अदालत का मानना है कि मीडिया रिपोर्टों के अलावा कोई ठोस सबूत पेश नहीं किए गए हैं। दूसरी ओर, इकरा हसन लगातार इस मुद्दे को लोकतांत्रिक संस्थाओं के संरक्षण से जोड़कर सरकार पर दबाव बना रही हैं।