अयोध्या में बनेगा इंटरनेशनल रामकथा म्यूजियम, 20 गैलरी में दिखेगा 500 साल का इतिहास

अयोध्या की पावन धरती पर श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए एक बेहद खास तोहफा तैयार हो रहा है। सरयू नदी के तट पर श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट द्वारा विकसित किया जा रहा इंटरनेशनल रामकथा म्यूजियम अयोध्या अब अपने अंतिम चरण में है। अधिकारियों का लक्ष्य है कि अगले साल तक इस भव्य संग्रहालय के दरवाजे दुनिया भर से आने वाले आगंतुकों के लिए खोल दिए जाएं।
यह म्यूजियम केवल एक प्रदर्शनी नहीं, बल्कि भगवान श्री राम के आदर्शों, रामायण की कालजयी कथा और राम मंदिर आंदोलन के संघर्ष की एक जीवंत यात्रा होगी। यहाँ कुल 20 गैलरी बनाई गई हैं, जिनमें से हर एक का अपना एक विशेष विषय (थीम) है। इन गैलरी में ऐतिहासिक दस्तावेजों, प्राचीन वस्तुओं और उन सबूतों को सहेजा जाएगा जो श्री राम जन्मभूमि और उनके वैश्विक प्रभाव को दर्शाते हैं।
आस्था और संघर्ष की अनकही कहानियाँ
संग्रहालय की सबसे खास गैलरी 'आस्था के पत्रपत्र' होगी। यहाँ सदियों पुरानी उन चिट्ठियों और दस्तावेजों को दिखाया जाएगा, जो यह बताते हैं कि समय के साथ राम भक्ति कैसे गहरी होती गई। इसी हिस्से में सूर्यवंशी क्षत्रियों के उस संकल्प को भी दर्ज किया जाएगा, जिन्होंने वर्षों पहले यह प्रण लिया था कि जब तक जन्मभूमि पर मंदिर नहीं बन जाता, वे अपनी शादियों में जूते और पगड़ी नहीं पहनेंगे।
वहीं, 'संघर्ष की अमरगाथा' नाम की गैलरी उन लोगों को समर्पित होगी जिन्होंने मंदिर निर्माण के लिए लंबा संघर्ष किया। इसमें शुरुआती आंदोलनों से लेकर जन-आंदोलन बनने तक की पूरी कहानी और लंबी कानूनी लड़ाइयों के ऐतिहासिक रिकॉर्ड प्रदर्शित किए जाएंगे।
इतना ही नहीं, 'राम जन्मभूमि: एक अमित धरोहर' गैलरी में उन पुरातात्विक अवशेषों को रखा जाएगा, जो 2003 में इलाहाबाद हाईकोर्ट के निर्देश पर ASI द्वारा की गई खुदाई में मिले थे, साथ ही हाल ही में मंदिर निर्माण के दौरान मिली महत्वपूर्ण चीजें भी यहाँ मौजूद होंगी।
म्यूजियम के डायरेक्टर डॉ. संजीव कुमार सिंह ने पुष्टि की है कि सभी 20 गैलरियों के लिए जरूरी सामग्री, ऐतिहासिक दस्तावेज और सबूत इकट्ठा कर लिए गए हैं और अब उन्हें प्रदर्शनी के लिए व्यवस्थित किया जा रहा है। उम्मीद है कि यह म्यूजियम जल्द ही तीर्थयात्रियों के लिए ज्ञान और श्रद्धा का एक बड़ा केंद्र बनेगा।