स्वदेशी रेलवे बोगी डिजाइन को बढ़ावा देने के लिए आईआईटी कानपुर में वर्कशॉप आयोजित

आईआईटी कानपुर में स्वदेशी रेलवे बोगी और रोलिंग स्टॉक डिजाइन पर वर्कशॉप आयोजित की गई, ताकि विदेशी तकनीक पर निर्भरता कम हो सके।

Sushant Singh31 October 20262 min read0 viewsउत्तर प्रदेश
स्वदेशी रेलवे बोगी डिजाइन को बढ़ावा देने के लिए आईआईटी कानपुर में वर्कशॉप आयोजित

भारतीय रेलवे को आधुनिक और आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में आईआईटी कानपुर ने एक बड़ी पहल की है। संस्थान के सेंटर फॉर रेलवे रिसर्च (CRR) ने आउटरीच ऑडिटोरियम में 'बोगी और रोलिंग स्टॉक डिजाइन' विषय पर एक दिवसीय वर्कशॉप का आयोजन किया। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य देश में ही रेलवे बोगी और रोलिंग स्टॉक के डिजाइन की क्षमता को विकसित करना है, ताकि भविष्य में विदेशी तकनीक पर निर्भरता को कम किया जा सके।

इस वर्कशॉप के जरिए आईआईटी कानपुर में रोलिंग स्टॉक और बोगी डिजाइन के लिए एक 'सेंटर ऑफ एक्सीलेंस' (CoE) स्थापित करने की योजना पर चर्चा की गई। इस केंद्र के माध्यम से सिमुलेशन, विकास और टेस्टिंग की स्वदेशी क्षमताओं को मजबूत किया जाएगा। वर्कशॉप के दौरान विशेषज्ञों ने व्हील-रेल डायनेमिक्स, वर्चुअल प्रोटोटाइपिंग, थकान और टिकाऊपन (fatigue and durability) जैसे तकनीकी पहलुओं पर गहराई से विचार-विमर्श किया। साथ ही, आरडीएसओ (RDSO) द्वारा अनुमोदित एक बोगी डिजाइन प्रोजेक्ट को तकनीकी सुधार के लिए आईआईटी कानपुर में स्थानांतरित करने की संभावनाओं को भी तलाशा गया।

मेंटेनेंस की चुनौतियों और स्वदेशी तकनीक पर जोर

कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल उत्तर मध्य रेलवे के प्रधान मुख्य यांत्रिक इंजीनियर अनिल कुमार द्विवेदी ने वर्तमान परिचालन चुनौतियों पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि एलएचबी (LHB) कोचों में प्राइमरी और सेकेंडरी सस्पेंशन स्प्रिंग की विफलता, ब्रेक रिगिंग जाम और ब्रेक रिलीज में देरी जैसी समस्याएं सामने आ रही हैं। द्विवेदी ने स्पष्ट किया कि इन रखरखाव संबंधी दिक्कतों के कारण ट्रेनों की गति सीमित करनी पड़ती है और अनियोजित डाउनटाइम बढ़ता है, इसलिए डिजाइन स्तर से ही विश्वसनीयता और टिकाऊपन पर शोध करना अनिवार्य है।

वहीं, बेस्को इंडस्ट्रीज के चेयरमैन ओ.पी. तंतिया ने विदेशी तकनीक को छोड़कर घरेलू बौद्धिक संपदा (Intellectual Property) विकसित करने की वकालत की। उन्होंने कहा कि प्रस्तावित सेंटर ऑफ एक्सीलेंस से छोटे उद्योगों को बहुत लाभ होगा, क्योंकि उनके पास महंगे टेस्टिंग और रिसर्च बुनियादी ढांचे में निवेश करने की क्षमता नहीं होती। इस पूरी पहल को भारतीय रेलवे और रिसर्च डिजाइन्स एंड स्टैंडर्ड्स ऑर्गनाइजेशन (RDSO) के सहयोग से आगे बढ़ाया जा रहा है, ताकि स्वदेशी डिजाइन मानकों का सही तरीके से सत्यापन और कार्यान्वयन सुनिश्चित किया जा सके।

Share:

Comments

Leave a comment