IIT BHU के वैज्ञानिकों का कमाल, ग्रीन लाइट से खत्म होंगे बैक्टीरिया और ठीक होंगे संक्रमित घाव

वाराणसी स्थित भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT BHU) के वैज्ञानिकों ने स्वास्थ्य क्षेत्र में एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है। शोधकर्ताओं ने एक ऐसी नई तकनीक विकसित की है जो ग्रीन लाइट (हरी रोशनी) की मदद से बैक्टीरिया के संक्रमण को खत्म करने और संक्रमित घावों को तेजी से भरने में सक्षम है। इस महत्वपूर्ण शोध को दुनिया के प्रतिष्ठित 'नेचर पोर्टफोलियो' के जर्नल 'कम्युनिकेशंस केमिस्ट्री' में प्रकाशित किया गया है, जो इस खोज की वैश्विक अहमियत को दर्शाता है।
यह शोध आईआईटी बीएचयू के केमिस्ट्री विभाग की एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. सम्या बनर्जी और स्कूल ऑफ बायोमेडिकल इंजीनियरिंग के डॉ. सुदीप मुखर्जी के रिसर्च ग्रुप्स के साझा प्रयास का परिणाम है। इस टीम ने केमिस्ट्री, बायोमेडिकल और फार्मास्युटिकल इंजीनियरिंग की विशेषज्ञता को मिलाकर आधुनिक चिकित्सा की सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक 'एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस' (दवाओं के प्रति बैक्टीरिया का प्रतिरोध) से लड़ने का रास्ता खोजा है।
कैसे काम करती है यह अनोखी तकनीक?
वैज्ञानिकों ने इस शोध के दौरान ऑस्मियम-आधारित तीन विशेष केमिकल कंपाउंड्स (Os1, Os2 और Os3) तैयार किए हैं, जिन्हें 'मेटलोफोटोएंटीबायोटिक्स' कहा गया है। ये कंपाउंड्स तब सबसे ज्यादा असरदार होते हैं जब इन्हें ग्रीन लाइट के संपर्क में लाया जाता है। रोशनी के संपर्क में आते ही ये 'रिएक्टिव ऑक्सीजन स्पीशीज' (ROS) पैदा करते हैं, जो बैक्टीरिया की कोशिकाओं को नष्ट कर देते हैं और उनकी जैविक प्रक्रियाओं को बाधित कर देते हैं, जिससे बैक्टीरिया की ग्रोथ रुक जाती है।
इस तकनीक की सबसे बड़ी खूबी बैक्टीरिया द्वारा बनाए जाने वाले 'बायोफिल्म' को नष्ट करना है। बायोफिल्म बैक्टीरिया की एक सुरक्षात्मक परत होती है, जिसकी वजह से सामान्य एंटीबायोटिक्स काम नहीं कर पाते और मेडिकल डिवाइस से जुड़े संक्रमण को खत्म करना मुश्किल हो जाता है। लैब टेस्ट में पाया गया कि Os1 कंपाउंड ने ई. कोलाई और बैसिलस सबटिलिस जैसे बैक्टीरिया के बायोफिल्म निर्माण को करीब 85 प्रतिशत तक रोक दिया। चूहों पर किए गए प्रयोगों में भी इस तकनीक ने संक्रमित घावों को तेजी से भरने में सकारात्मक परिणाम दिखाए हैं।