हरदोई MLC स्नातक चुनाव: 47,838 वोटर करेंगे फैसला, सुरक्षा के कड़े इंतजाम

हरदोई में लखनऊ मंडल स्नातक एमएलसी चुनाव की तैयारियां पूरी। 67 पोलिंग स्टेशनों पर होगी वोटिंग, सुरक्षा के कड़े इंतजाम।

Shubham Singh22 October 20262 min read0 viewsउत्तर प्रदेश
हरदोई MLC स्नातक चुनाव: 47,838 वोटर करेंगे फैसला, सुरक्षा के कड़े इंतजाम

हरदोई जिले में लखनऊ मंडल स्नातक निर्वाचन के लिए माहौल पूरी तरह गरमा चुका है। इस महत्वपूर्ण चुनाव में जिले के 47,838 स्नातक मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग कर यह तय करेंगे कि उनकी आवाज विधानसभा परिषद में कौन उठाएगा। चुनाव को निष्पक्ष और शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न कराने के लिए प्रशासन ने कमर कस ली है।

गुरुवार को गवर्नमेंट इंटर कॉलेज (GIC) मैदान से पोलिंग पार्टियों को चुनावी सामग्री के साथ रवाना किया गया। शुक्रवार को सुबह 8 बजे से शाम 4 बजे तक वोट डाले जाएंगे। इसके लिए जिले में कुल 47 केंद्रों पर 67 पोलिंग स्टेशन बनाए गए हैं। सुरक्षा व्यवस्था को चाक-चौबंद रखने के लिए पूरे जिले को 20 सेक्टरों में बांटा गया है, जहां पांच जोनल मजिस्ट्रेट और पांच जोनल पुलिस अधिकारियों की तैनाती की गई है। हर पोलिंग बूथ पर पुलिस और सशस्त्र बलों के जवान तैनात रहेंगे। जिलाधिकारी राहुल पांडे और पुलिस अधीक्षक अशोक कुमार मीणा ने खुद डिस्पैच साइट का निरीक्षण कर अधिकारियों को जरूरी दिशा-निर्देश दिए हैं।

विकास और बेरोजगारी पर टिकी हैं मतदाताओं की नजरें

इस चुनाव में मुख्य मुद्दा पिछले छह वर्षों में विकास निधि का उपयोग और अधूरी पड़ी परियोजनाएं हैं। स्नातक मतदाता इस बात पर गौर कर रहे हैं कि युवाओं के लिए वास्तव में क्या किया गया। प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्रों के लिए डिजिटल लाइब्रेरी और अध्ययन सुविधाओं की मांग जोर पकड़ रही है। इसके अलावा, बेरोजगारी, भर्ती प्रक्रियाओं में देरी और पेपर लीक जैसे गंभीर मुद्दे भी चर्चा के केंद्र में हैं।

वहीं, राजनीतिक गलियारों में भाजपा उम्मीदवार अवनीश कुमार सिंह को लेकर खींचतान भी देखने को मिल रही है। मल्लवान शहर इकाई के महासचिव और मनोनीत पार्षद वीरेंद्र मिश्रा 'बाबा' के बयानों ने पार्टी के भीतर असंतोष को उजागर किया है। मिश्रा ने आरोप लगाया कि जमीनी कार्यकर्ताओं की अनदेखी की जा रही है और कुछ 'नाममात्र के संतों' द्वारा हजारों वोटों के दावे किए जा रहे हैं। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि पार्टी के भीतर की यह नाराजगी मतदान के दिन कितना असर डालती है। हालांकि कई बड़े नेताओं ने उम्मीदवार के समर्थन में अपील की है, लेकिन यह भी चर्चा है कि कई प्रभावशाली लोग खुद इस चुनाव में पंजीकृत मतदाता नहीं हैं।

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