हमीरपुर का बिहुनी कलां गांव: जहां पुतला जलाना नहीं, बल्कि रावण की पूजा करना है परंपरा

Sushant Singh20 October 20261 min read0 viewsउत्तर प्रदेश
हमीरपुर का बिहुनी कलां गांव: जहां पुतला जलाना नहीं, बल्कि रावण की पूजा करना है परंपरा

दशहरा यानी विजयादशमी का त्योहार पूरे देश में बुराई पर अच्छाई की जीत के प्रतीक के रूप में मनाया जाता है। इस दिन हर जगह रावण के पुतले जलाए जाते हैं, लेकिन उत्तर प्रदेश के हमीरपुर जिले में एक ऐसा गांव है जहां की परंपरा पूरी दुनिया से अलग है। हमीरपुर के मस्करा विकास खंड के बिहुनी कलां गांव में लोग रावण का पुतला जलाने के बजाय उसकी पूजा-अर्चना करते हैं।

गांव के बीचों-बीच, रामलीला मैदान के ठीक सामने रावण की एक विशाल प्रतिमा स्थापित है, जो यहां की सदियों पुरानी आस्था का केंद्र है। जब पूरा देश रावण के दहन की तैयारी में जुटा होता है, तब इस गांव के निवासी एकजुट होकर इस प्रतिमा को सजाते हैं और सामूहिक रूप से विशेष अनुष्ठान और पूजा करते हैं।

10 फीट ऊंची प्रतिमा और अनोखी बनावट

गांव में स्थित रावण की यह प्रतिमा करीब 10 फीट ऊंची है, जिसे चूने और सीमेंट से बनाया गया है। इस प्रतिमा की बनावट बेहद खास है; इसमें रावण को बैठे हुए मुद्रा में दिखाया गया है। प्रतिमा में रावण के नौ सिर और बीस भुजाएं हैं, जो उसकी शक्ति और विद्वता को दर्शाते हैं। इसके अलावा, रावण के मुकुट पर घोड़े की आकृति बनी हुई है, जो इसे और भी विशिष्ट बनाती है।

स्थानीय निवासियों का मानना है कि यह परंपरा उनकी सांस्कृतिक पहचान का हिस्सा है और वे पीढ़ी दर पीढ़ी इसे निभाते आ रहे हैं। जहां दुनिया के लिए रावण केवल एक खलनायक है, वहीं बिहुनी कलां के लोग अपनी इस अनोखी परंपरा के जरिए एक अलग नजरिया पेश करते हैं।

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