ग्रेटर नोएडा: प्रदर्शन की तैयारी में जुटे किसानों और सपा नेताओं को पुलिस ने हिरासत में लिया

ग्रेटर नोएडा किसान प्रदर्शन को रोकने के लिए पुलिस प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद नजर आया। यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (YEIDA) के दफ्तर पर विरोध प्रदर्शन करने जा रहे दर्जनों किसानों और समाजवादी पार्टी के नेताओं को पुलिस ने रास्ते में ही रोककर हिरासत में ले लिया। यह पूरी कार्रवाई उस समय हुई जब इलाके में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 163 लागू है, जिसके तहत बिना अनुमति के सार्वजनिक जमावड़ा लगाना प्रतिबंधित है।
20 अक्टूबर 2026 को पुलिस ने अलग-अलग स्थानों पर नाकाबंदी कर किसानों को रोका। जो लोग किसी तरह प्राधिकरण कार्यालय तक पहुंचने में कामयाब रहे, उन्हें तुरंत पकड़कर बसों में भरा गया और पुलिस लाइन भेज दिया गया। इस विरोध प्रदर्शन का नेतृत्व किसान एकता संघ के सोरन प्रधान, रूपेश वर्मा और सुखबीर खलीफा जैसे नेता कर रहे थे।
10% विकसित प्लॉट और मुआवजे की मांग पर बढ़ा विवाद
किसानों के इस गुस्से की मुख्य वजह प्राधिकरण द्वारा किए गए वादों का पूरा न होना है। किसानों का आरोप है कि 10% विकसित प्लॉट योजना को लेकर 5 अक्टूबर 2026 तक जो आश्वासन दिए गए थे, उन्हें पूरा नहीं किया गया। इसी के विरोध में किसान संघर्ष मोर्चा ने 21 अक्टूबर 2026 से यमुना अथॉरिटी पर अनिश्चितकालीन 'महापड़ाव' शुरू कर दिया है।
प्रदर्शनकारियों की मुख्य मांगें इस प्रकार हैं:
- अतिरिक्त 64% मुआवजे का भुगतान किया जाए।
- आबादी की जमीन से जुड़े तमाम विवादों का जल्द समाधान हो।
- प्राधिकरण अपने पुराने वादों पर अमल करे।
दिलचस्प बात यह है कि इस मामले में धारा 163 के जरिए प्रदर्शनों को दबाने की कोशिशों पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी चर्चा हुई है। संयुक्त राष्ट्र के विशेषज्ञों ने इस पर चिंता जताते हुए कहा है कि इस तरह के प्रतिबंध शांतिपूर्ण सभा और अभिव्यक्ति की आजादी के कानूनी अधिकारों का उल्लंघन हो सकते हैं। फिलहाल, इलाके में तनावपूर्ण शांति बनी हुई है और भारी पुलिस बल तैनात है।