गोरखपुर एम्स डायरेक्टर का निजी अस्पताल में इलाज, अखिलेश यादव ने स्वास्थ्य सेवाओं पर उठाए सवाल

गोरखपुर एम्स की डायरेक्टर को निजी अस्पताल में कराना पड़ा इलाज, अखिलेश यादव ने स्वास्थ्य सुविधाओं पर उठाए सवाल।

Shubham Singh31 October 20262 min read0 viewsउत्तर प्रदेश
गोरखपुर एम्स डायरेक्टर का निजी अस्पताल में इलाज, अखिलेश यादव ने स्वास्थ्य सेवाओं पर उठाए सवाल

उत्तर प्रदेश के गोरखपुर में स्थित एम्स (AIIMS) की स्वास्थ्य सुविधाओं को लेकर एक बड़ा राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। मामला तब गरमाया जब एम्स गोरखपुर की कार्यकारी निदेशक डॉ. विभा दत्ता को अचानक तबीयत बिगड़ने पर एक निजी अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा। इस घटना ने अस्पताल के भीतर बुनियादी सुविधाओं की कमी को उजागर कर दिया है, जिसे लेकर समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने राज्य सरकार और प्रशासन पर तीखा हमला बोला है।

जानकारी के मुताबिक, 28 अक्टूबर (बुधवार) को डॉ. विभा दत्ता अपने सरकारी आवास पर अचानक बेहोश हो गई थीं। उन्हें तुरंत एम्स गोरखपुर ले जाया गया, लेकिन वहां आवश्यक जांच और इलाज के लिए जरूरी 'कैथ लैब' (Cath Lab) सुविधा उपलब्ध नहीं थी। इस वजह से उन्हें आगे के कार्डियक मूल्यांकन के लिए एक प्राइवेट अस्पताल में शिफ्ट करना पड़ा। राहत की बात यह रही कि निजी अस्पताल की सभी मेडिकल रिपोर्ट सामान्य आईं और वे 29 अक्टूबर को दोबारा काम पर लौट आईं।

सात साल बाद भी कैथ लैब का इंतजार

अखिलेश यादव ने इस घटना को ढाल बनाकर सरकार की स्वास्थ्य नीतियों पर सवाल खड़े किए हैं। उनका कहना है कि जब एक बड़े संस्थान की डायरेक्टर को ही अपने अस्पताल में इलाज नहीं मिल सका, तो आम जनता की स्थिति क्या होगी? विवाद की मुख्य वजह एम्स गोरखपुर में कैथ लैब का न होना है। गौरतलब है कि इस संस्थान का उद्घाटन फरवरी 2019 में हुआ था, लेकिन सात साल बीत जाने के बाद भी यहां कैथ लैब और अन्य विशेष चिकित्सा मशीनें पूरी तरह चालू नहीं हो पाई हैं। फिलहाल इन मशीनों को लगाने की प्रक्रिया चल रही है।

डॉ. विभा दत्ता, जो पहले एम्स नागपुर (2018-2023) की डायरेक्टर रह चुकी हैं, ने 30 जनवरी 2025 को एम्स गोरखपुर की कार्यकारी निदेशक का पद संभाला था। वह इस पद पर नियुक्त होने वाली पांचवीं व्यक्ति हैं। अब इस घटना ने एम्स के बुनियादी ढांचे और प्रबंधन पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

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