गोंडा: डिजिटल अरेस्ट के नाम पर प्राइवेट स्कूल प्रिंसिपल से 21 लाख की ठगी

उत्तर प्रदेश के गोंडा जिले से साइबर ठगी का एक सनसनीखेज मामला सामने आया है, जहां 'डिजिटल अरेस्ट' के जाल में फंसकर एक प्राइवेट स्कूल की प्रिंसिपल ने अपनी जीवन भर की जमा पूंजी गंवा दी। ठगों ने खुद को कानून प्रवर्तन अधिकारी बताकर मालवीय नगर निवासी 40 वर्षीय वीना श्रीवास्तव को डराया और उनसे कुल 21,30,600 रुपये ठग लिए।
यह पूरी वारदात 9 अक्टूबर को शुरू हुई, जब पीड़िता को व्हाट्सएप पर एक वीडियो कॉल आया। कॉल करने वालों ने दावा किया कि उनका नाम एक बड़े वित्तीय धोखाधड़ी और मनी लॉन्ड्रिंग मामले में सामने आया है। ठगों ने उन्हें धमकाया कि उनके खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी हो चुका है। पीड़िता को यकीन दिलाने के लिए जालसाजों ने भारतीय रिजर्व बैंक (RBI), सेबी (SEBI) और राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) के फर्जी दस्तावेज भी भेजे।
सरकारी खाते में पैसे भेजने का दबाव
ठगों ने वीना श्रीवास्तव को विश्वास दिलाया कि अगर वह जांच के लिए अपने पैसे एक 'सरकारी खाते' में ट्रांसफर कर दें, तो उनकी समस्या हल हो सकती है। डर और दबाव में आकर पीड़िता ने अपने दो अलग-अलग बैंक खातों से पैसे ट्रांसफर किए। उन्होंने उत्तर प्रदेश ग्रामीण बैंक के खाते से 14,00,300 रुपये और बैंक ऑफ बड़ौदा के खाते से 7,30,300 रुपये RTGS के जरिए ठगों द्वारा बताए गए खातों में भेज दिए।
जैसे ही बड़ी रकम उनके खातों में पहुंची, आरोपियों ने पीड़िता से सारे संपर्क तोड़ लिए। ठगी का एहसास होने के बाद 10 अक्टूबर को साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई गई।
इस मामले की जांच साइबर पुलिस स्टेशन के प्रभारी सत्य प्रकाश यादव को सौंपी गई है। पुलिस ने पीड़िता से बैंक ट्रांजेक्शन के सबूत, व्हाट्सएप चैट और कॉल रिकॉर्डिंग मांगी है ताकि आरोपियों तक पहुंचा जा सके। पुलिस मामले की गहनता से जांच कर रही है।