दिवाली से पहले गोंडा में सजा मिनी मिट्टी कला मेला, स्थानीय कारीगरों की कला का दिखेगा जलवा

दिवाली के अवसर पर गोंडा के प्रजापति पुरम में मिनी मिट्टी कला मेला लगा है। यहां स्थानीय कारीगर अपने हस्तशिल्प और मिट्टी के उत्पादों का प्रदर्शन कर रहे हैं।

Sushant Singh5 November 20261 min read0 viewsउत्तर प्रदेश
दिवाली से पहले गोंडा में सजा मिनी मिट्टी कला मेला, स्थानीय कारीगरों की कला का दिखेगा जलवा

दिवाली के त्योहार की रौनक अब गोंडा में भी दिखने लगी है। उत्तर प्रदेश मटिकाला बोर्ड के तत्वावधान में जिले के बहराइच रोड स्थित जानकी नगर के प्रजापति पुरम में एक गोंडा मिनी मिट्टी कला मेला आयोजित किया गया है। इस मेले का मुख्य उद्देश्य पारंपरिक मिट्टी कला को बढ़ावा देना और स्थानीय शिल्पकारों को एक ऐसा मंच प्रदान करना है, जहां वे अपनी मेहनत और हुनर को सीधे ग्राहकों तक पहुंचा सकें।

यह मेला न केवल दिवाली की खरीदारी के लिए एक केंद्र है, बल्कि यह हमारी लुप्त होती पारंपरिक कलाओं को जीवित रखने की एक कोशिश भी है। मेले में आने वाले लोग मिट्टी से बनी विभिन्न प्रकार की कलाकृतियों और दैनिक उपयोग की वस्तुओं को देख सकते हैं। यह आयोजन 7 नवंबर 2026 तक आम जनता के लिए खुला रहेगा, जिससे लोगों को पर्याप्त समय मिल सके कि वे यहां आकर स्थानीय उत्पादों का लाभ उठाएं।

मिट्टी के दीयों से लेकर खिलौनों तक की विस्तृत श्रृंखला

जिला ग्रामोद्योग अधिकारी महेंद्र कुमार मिश्रा ने बताया कि इस आयोजन के जरिए कारीगरों, शिल्पकारों और छोटे उद्यमियों को अपने उत्पादों की प्रदर्शनी लगाने और उन्हें बेचने का सुनहरा अवसर मिला है। उनका कहना है कि इस पहल से मिट्टी के बर्तनों और उपयोगिता वाली वस्तुओं को आम जनता तक पहुँचाया जा रहा है, जिससे इस उद्योग से जुड़े श्रमिकों का मनोबल बढ़ेगा।

क्षेत्रीय ब्यूरो चीफ अमित कुमार श्रीवास्तव के अनुसार, मेले में मिट्टी के सुंदर दीयों, आकर्षक खिलौनों और पारंपरिक बर्तनों का शानदार संग्रह उपलब्ध है। प्रशासन ने जिले के निवासियों से अपील की है कि वे बड़ी संख्या में इस मेले में आएं और मिट्टी के उत्पादों की खरीदारी करें। ऐसा करने से न केवल स्थानीय कलाकारों को आर्थिक संबल मिलेगा, बल्कि हमारी स्वदेशी और पारंपरिक कलाओं का संरक्षण भी होगा।

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