गोंडा: IGRS पोर्टल पर लापरवाही, डीएम प्रियंका निरंजन ने कई अधिकारियों का वेतन काटने का दिया आदेश

उत्तर प्रदेश के गोंडा जिले में प्रशासनिक ढिलाई पर डीएम प्रियंका निरंजन ने सख्त रुख अपनाया है। कलेक्ट्रेट ऑडिटोरियम में आयोजित एक समीक्षा बैठक के दौरान जब गोंडा डीएम वेतन कटौती का मामला सामने आया, तो यह स्पष्ट हो गया कि जन शिकायतों के निस्तारण में केवल कागजी खानापूर्ति से काम नहीं चलेगा। डीएम ने पाया कि इंटीग्रेटेड ग्रीवेंस रिड्रेसल सिस्टम (IGRS) पोर्टल पर शिकायतों के निपटारे में भारी लापरवाही बरती गई है और जनता का फीडबैक संतोषजनक नहीं है।
डीएम ने इस गंभीर लापरवाही पर नाराजगी जताते हुए कई अधिकारियों के एक दिन के वेतन कटौती के आदेश जारी किए हैं। इस कार्रवाई की जद में ब्लॉक विकास अधिकारी (BDO), खंड शिक्षा अधिकारी (BEO) और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) के अधीक्षक आए हैं।
इन अधिकारियों पर गिरी गाज
वेतन कटौती के आदेशों में इटियाथोक, पांदरी कृपाल, वजीरगंज, रुपइया, छपिया, मनकापुर और नवाबगंज के बीडीओ शामिल हैं। साथ ही मुजेहना, बेलसर, पांदरी कृपाल, कटरा बाजार, झंझरी, रुपइया और हलदर्मऊ के बीईओ के वेतन में कटौती की जाएगी। स्वास्थ्य विभाग से करनैलगंज, तरबगंज, इटियाथोक, रुपइया और परसपुर के सीएचसी अधीक्षकों पर यह कार्रवाई हुई है। इसके अलावा कटरा बाजार और करनैलगंज के सीडीपीओ, नगर पंचायत बेलसर के अधिशासी अधिकारी और कई तहसीलों के एडीओ पंचायत भी इस सूची में शामिल हैं।
डीएम प्रियंका निरंजन ने कड़े शब्दों में कहा कि शिकायतों का निस्तारण इस तरह होना चाहिए कि शिकायतकर्ता वास्तव में संतुष्ट हो, न कि केवल औपचारिकता पूरी की जाए। उन्होंने चेतावनी दी कि जिन लेखपालों के खिलाफ सबसे अधिक असंतोषजनक फीडबैक मिला है, उनके खिलाफ निलंबन सहित विभागीय कार्रवाई शुरू की जाए।
बैठक में राजस्व मामलों पर भी चर्चा हुई, जहां डीएम ने सभी एसडीएम, तहसीलदार और नायब तहसीलदारों को निर्देश दिया कि जो राजस्व मामले तीन से पांच साल से लंबित हैं, उन्हें प्राथमिकता के आधार पर निपटाया जाए ताकि आम जनता को समय पर न्याय मिल सके। इसके साथ ही सीएम डैशबोर्ड और टैक्स वसूली की प्रगति की समीक्षा करते हुए उन्होंने जनसेवा में संवेदनशीलता और जवाबदेही को सर्वोच्च प्राथमिकता देने की बात कही।