गोंडा: फर्जी आधार से अवैध सिम एक्टिवेट करने वाला शातिर एजेंट गिरफ्तार, साइबर अपराधियों को करता था सप्लाई

Shubham Singh12 October 20262 min read0 viewsउत्तर प्रदेश
गोंडा: फर्जी आधार से अवैध सिम एक्टिवेट करने वाला शातिर एजेंट गिरफ्तार, साइबर अपराधियों को करता था सप्लाई

उत्तर प्रदेश के गोंडा जिले में पुलिस और साइबर सेल ने एक बड़े नेटवर्क का भंडाफोड़ किया है। पुलिस ने एक ऐसे व्यक्ति को गिरफ्तार किया है जो भोले-भाले ग्राहकों की पहचान का गलत इस्तेमाल कर अवैध सिम कार्ड एक्टिवेट करता था और उन्हें साइबर अपराधियों को बेचता था। यह पूरा खेल 'फेस केवाईसी' (Face KYC) की खामियों का फायदा उठाकर चलाया जा रहा था।

क्षेत्रीय ब्यूरो प्रमुख अमित कुमार श्रीवास्तव के मुताबिक, पुलिस को 11 अक्टूबर 2026 को एक गुप्त सूचना मिली थी। इसके बाद बलपुर जाट केशवजोत मोड़ के पास छापेमारी कर अजय कुमार सिंह नाम के व्यक्ति को पकड़ा गया। अजय एक अधिकृत सिम कार्ड वेंडर (POS एजेंट) था, जिसने भरोसे का फायदा उठाकर धोखाधड़ी का जाल बिछाया था।

सर्वर डाउन बताकर करता था फर्जीवाड़ा

जांच में सामने आया कि आरोपी अजय ग्राहकों को यह कहकर गुमराह करता था कि सर्वर में समस्या है, जबकि वह चुपके से उनके नाम पर अतिरिक्त सिम कार्ड एक्टिवेट कर लेता था। इतना ही नहीं, वह तस्वीरों में छेड़छाड़ कर फर्जी आधार कार्ड भी बनाता था ताकि पहचान की प्रक्रिया को आसानी से पूरा किया जा सके।

पकड़े गए आरोपी के बारे में पुलिस ने जो खुलासे किए हैं, वे चौंकाने वाले हैं:

  • इन अवैध सिम कार्ड्स को टेलीग्राम और व्हाट्सएप के जरिए साइबर अपराधियों को बेचा जाता था।
  • साइबर फ्रॉड से होने वाली कमाई का 25 प्रतिशत कमीशन आरोपी को कैश में कूरियर के जरिए मिलता था।
  • जिन लोगों के नाम पर सिम एक्टिवेट हुए, उन्हें इस बात की भनक तक नहीं थी कि उनके नाम पर कई और सिम चल रहे हैं।

पुलिस ने आरोपी के पास से एक मोबाइल फोन, दो एयरटेल सिम कार्ड और एक फर्जी आधार कार्ड बरामद किया है। यह मामला तब खुला जब अंतरराज्यीय वित्तीय साइबर धोखाधड़ी की शिकायतों की जांच की गई और सभी तार इसी नेटवर्क से जुड़े पाए गए।

इस मामले में कोतवाली देहात पुलिस स्टेशन में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 318(4) और 338, साथ ही आईटी एक्ट की धारा 66C और 66D के तहत मामला दर्ज किया गया है। पुलिस अब इस बात की जांच कर रही है कि इस नेटवर्क के जरिए कितने लोगों की पहचान का गलत इस्तेमाल हुआ और इस गिरोह में और कौन-कौन शामिल है।

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