बरेली: ओमैक्स टाउनशिप विवाद में घिरे मंत्री के पति गिरधारी पप्पू, 39 केसों के बीच हुए फरार

उत्तराखंड मंत्री रेखा आर्य के पति गिरधारी पप्पू पर बरेली में ओमैक्स टाउनशिप प्रोजेक्ट को लेकर गंभीर आरोप लगे हैं, वे फिलहाल फरार बताए जा रहे हैं।

Shubham Singh26 October 20262 min read0 views
बरेली: ओमैक्स टाउनशिप विवाद में घिरे मंत्री के पति गिरधारी पप्पू, 39 केसों के बीच हुए फरार

उत्तराखंड की कैबिनेट मंत्री रेखा आर्य के पति गिरधारी पप्पू इस समय बड़ी कानूनी मुसीबत में फंस गए हैं। बरेली के लालपुर-अधलकिया इलाके में दिल्ली-लखनऊ हाईवे पर बन रही आलीशान ओमैक्स टाउनशिप प्रोजेक्ट को लेकर विवाद गहरा गया है, जिसके बाद देहरादून में उनके खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज किया गया है। खबर है कि 15 अक्टूबर 2026 को एफआईआर दर्ज होने के बाद से ही गिरधारी पप्पू अंडरग्राउंड हो गए हैं।

यह पूरा मामला 800 करोड़ रुपये की लागत से तैयार हो रही ओमैक्स टाउनशिप से जुड़ा है, जो करीब 71.78 एकड़ जमीन पर फैली है। इस प्रोजेक्ट को नौ पार्टनर्स के एक समूह द्वारा विकसित किया जा रहा है। सरकारी दस्तावेजों के मुताबिक, इस जमीन का 1.848 एकड़ हिस्सा गिरधारी पप्पू और उनके भतीजे सत्येंद्र राठौर के नाम पर दर्ज है। विवाद तब और बढ़ गया जब खुद मंत्री रेखा आर्य ने अपने पति पर धोखाधड़ी, उत्पीड़न और एससी/एसटी एक्ट के उल्लंघन जैसे गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि गिरधारी पप्पू ने उन्हें कंपनी के डायरेक्टोरशिप से अवैध रूप से हटाने की कोशिश की है।

SIT की जांच और नेपाल भागने की आशंका

इस पूरे मामले की गंभीरता को देखते हुए देहरादून की स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) जांच कर रही है। SIT ने बरेली से जरूरी दस्तावेज भी जुटा लिए हैं। पुलिस को अंदेशा है कि गिरधारी पप्पू देश छोड़कर नेपाल भाग सकते हैं, जिसके चलते उनके खिलाफ लुकआउट सर्कुलर जारी करने की तैयारी चल रही है। चौंकाने वाली बात यह है कि उन पर अलग-अलग क्षेत्रों में कुल 39 आपराधिक मामले दर्ज बताए जा रहे हैं।

दूसरी ओर, बरेली विकास प्राधिकरण (BDA) ने स्पष्ट कर दिया है कि जब तक सरकार की मंजूरी नहीं मिलती और सभी नौ पार्टनर्स के मालिकाना हक व बैकग्राउंड की पूरी जांच नहीं हो जाती, तब तक प्रोजेक्ट के नक्शे जारी नहीं किए जाएंगे। इतना ही नहीं, BDA ने लालपुर स्थित उनके 3 एकड़ के फार्महाउस की भी जांच शुरू कर दी है, क्योंकि आरोप है कि इसका निर्माण बिना किसी स्वीकृत नक्शे के किया गया है।

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