गाजीपुर में मेगा हेल्थ कैंप का कमाल: 35 हजार से ज्यादा मरीजों का इलाज, 346 सर्जरी फ्री

उत्तर प्रदेश के गाजीपुर में स्वास्थ्य सेवाओं की एक ऐसी मिसाल पेश की गई है, जिसने हजारों ग्रामीण परिवारों को बड़ी राहत दी है। 'सेवा संकल्प अभियान 2026' के तहत आयोजित एक छह दिवसीय फ्री मेगा हेल्थ कैंप में 35,200 से अधिक मरीजों ने इलाज कराया। इस कैंप की सबसे खास बात यह रही कि यहाँ न केवल परामर्श दिया गया, बल्कि 35,828 लैब टेस्ट और 346 जटिल सर्जरी भी पूरी तरह मुफ्त में की गईं।
अक्सर गाजीपुर के ग्रामीण इलाकों के लोगों को विशेषज्ञ डॉक्टरों को दिखाने के लिए वाराणसी, लखनऊ या अन्य बड़े शहरों का रुख करना पड़ता था। लेकिन इस बार स्वास्थ्य सेवाएं खुद मरीजों के पास पहुँचीं। 26 सितंबर से 1 अक्टूबर तक चले इस कैंप का उद्घाटन उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने किया था। इसे साल 2026 का उत्तर प्रदेश का सबसे बड़ा स्वास्थ्य शिविर बताया जा रहा है।
देशभर के दिग्गज डॉक्टरों ने मिलाया हाथ
इस महा-अभियान को सफल बनाने के लिए देश के अलग-अलग कोनों से विशेषज्ञ जुटे। एम्स नई दिल्ली, मुंबई के जसलोक अस्पताल, दिल्ली के अपोलो अस्पताल और वाराणसी के हेरिटेज अस्पताल जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों के डॉक्टरों सहित कुल 498 स्वास्थ्य कर्मियों की टीम ने अपनी सेवाएं दीं। महाराष्ट्र, गुजरात, गोवा, पंजाब और कर्नाटक से आए सर्जन्स ने स्थानीय मेडिकल कॉलेज के डॉक्टरों के साथ मिलकर काम किया।
कैंप में कुल 15 विशेषज्ञ सेवाएं उपलब्ध कराई गईं, जिनमें कार्डियोलॉजी, न्यूरोलॉजी, गैस्ट्रोएंटरोलॉजी, ऑर्थोपेडिक्स और नेत्र रोग जैसे गंभीर विभाग शामिल थे। आंकड़ों के मुताबिक, सबसे ज्यादा भीड़ जनरल मेडिसिन, ऑर्थोपेडिक्स, नेत्र रोग और न्यूरोलॉजी में देखी गई, जहाँ अकेले 21,120 मरीज पहुँचे।
सर्जरी की बात करें तो कुल 346 ऑपरेशनों में से 140 आंखों की सर्जरी थीं और 206 अन्य प्रक्रियाएं थीं, जिनमें ऑर्थोपेडिक्स और प्लास्टिक सर्जरी के 22 बेहद जटिल मामले भी शामिल थे। इस पूरे आयोजन में 'गाजीपुर के स्वास्थ्य योद्धा' कहे जाने वाले 350 से अधिक स्वयंसेवकों ने रजिस्ट्रेशन और मरीजों की मदद में अहम भूमिका निभाई।
आयोजक अभिनव सिन्हा ने बताया कि इस कैंप का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना था कि ग्रामीण और दूर-दराज के इलाकों में रहने वाले लोगों को इलाज के लिए लंबी दूरी तय न करनी पड़े। उन्होंने कहा कि यह केवल जांच शिविर नहीं था, बल्कि विशेषज्ञ परामर्श से लेकर सर्जरी तक की पूरी चेन को एक जगह लाकर मरीजों को पूर्ण उपचार देने की कोशिश थी। अब इस 'गाजीपुर मॉडल' को प्रदेश के अन्य हिस्सों में भी लागू करने की बात कही जा रही है।