फिरोजाबाद नगर निगम में भ्रष्टाचार का बवाल, भाजपा पार्षदों ने की SIT जांच की मांग

फिरोजाबाद नगर निगम में फंड गबन और कमीशनखोरी के गंभीर आरोप लगे हैं। भाजपा पार्षदों और चाणक्य फाउंडेशन ने SIT जांच की मांग की है।

Sushant Singh22 October 20262 min read0 viewsउत्तर प्रदेश

उत्तर प्रदेश के फिरोजाबाद नगर निगम में इन दिनों भ्रष्टाचार और सरकारी धन के दुरुपयोग को लेकर भारी हंगामा मचा हुआ है। शहर के विकास कार्यों में धांधली और कमीशनखोरी के गंभीर आरोपों ने प्रशासन की नींद उड़ा दी है। मामला इतना गरमा गया है कि अब सत्ताधारी दल भाजपा के पार्षदों ने ही नगर निगम के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है और इस पूरे मामले की SIT जांच कराने की मांग की है।

इस विवाद की शुरुआत तब हुई जब भाजपा पार्षद मुनेन्द्र यादव ने नगर निगम में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए। उन्होंने सार्वजनिक रूप से चुनौती देते हुए कहा कि अगर उनके आरोप गलत साबित हुए तो वह अपने पद से इस्तीफा दे देंगे। हालांकि, इस पर नगर आयुक्त की प्रतिक्रिया काफी सख्त रही और उन्होंने पार्षद को सीधे तौर पर इस्तीफा देने के लिए कह दिया, जिससे तनाव और बढ़ गया।

कमीशनखोरी और प्रशासनिक लापरवाही के आरोप

नगर निगम के भीतर चल रही गड़बड़ियों को लेकर केवल पार्षद ही नहीं, बल्कि सामाजिक संगठन भी सड़क पर उतर आए हैं। चाणक्य फाउंडेशन ने राज्यपाल को एक ज्ञापन सौंपकर उच्च स्तरीय SIT जांच की मांग की है। फाउंडेशन के सचिव पंडित अखिलेश शर्मा का आरोप है कि विकास परियोजनाओं के नाम पर अधिकारियों ने जमकर धनलापारी की है।

पार्षदों का दावा है कि ठेकों के बदले में 30% से 40% तक का कमीशन मांगा जा रहा था। इतना ही नहीं, नियमों के मुताबिक हर दो महीने में होने वाली नगर बोर्ड की बैठकें पिछले छह महीनों से नहीं बुलाई गईं, जिसे प्रशासनिक लापरवाही और पारदर्शिता की कमी माना जा रहा है।

इस पूरे विवाद में मेयर कामिनी राठौर की भूमिका पर भी सवाल उठे हैं। पार्षदों ने आरोप लगाया है कि मेयर के पति सुरेंद्र राठौर प्रशासनिक कार्यों में अनावश्यक हस्तक्षेप कर रहे हैं। भ्रष्टाचार और विकास कार्यों की अनदेखी से आक्रोशित होकर पार्षद नीतू शर्मा और उषा देवी शंकुआर ने तो सिर मुंडवाकर अपना विरोध दर्ज कराया था।

दूसरी ओर, प्रशासन की कार्यप्रणाली पर जिला मजिस्ट्रेट संतोष कुमार शर्मा ने भी नाराजगी जताई है। उन्होंने सीएम ग्रिड योजना के तहत रसूलपुर से नलबंद चौराहे तक बन रही स्मार्ट रोड परियोजना की धीमी रफ्तार पर असंतोष व्यक्त किया है। हालांकि, नगर निगम का प्रकाश विभाग हाल ही में स्ट्रीट लाइटों को ठीक करने के काम में जुटा रहा, लेकिन भ्रष्टाचार के इन गंभीर आरोपों ने निगम की छवि को गहरा धक्का पहुंचाया है।

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