हरियाणा में पत्रकारों की गिरफ्तारी: फर्रुखाबाद के पत्रकारों ने जताया कड़ा विरोध, PM को भेजा ज्ञापन

Shubham Singh13 October 20262 min read0 viewsउत्तर प्रदेश

हरियाणा में मीडियाकर्मियों की गिरफ्तारी का मामला अब उत्तर प्रदेश तक पहुंच गया है। फर्रुखाबाद के पत्रकारों ने इस घटना पर गहरा आक्रोश जताया है और उत्तर प्रदेश जर्नलिस्ट एसोसिएशन (UPJA) के बैनर तले एक औपचारिक ज्ञापन प्रधानमंत्री को भेजने के लिए अपर जिला मजिस्ट्रेट (न्यायिक) को सौंपा है। पत्रकारों का कहना है कि प्रेस की आजादी और संवैधानिक अधिकारों का हनन किसी भी लोकतंत्र के लिए सही नहीं है।

यह पूरा विवाद 'लिविंग इंडिया न्यूज' के स्टाफ की गिरफ्तारी से शुरू हुआ। बीते 10 अक्टूबर को कुरुक्षेत्र पुलिस ने चैनल के मैनेजिंग डायरेक्टर अतुल अग्रवाल, एडिटर सौरभ उपाध्याय और एंकर/एडिटर सुदेश नैन मोर समेत पत्रकार नीतू और ड्राइवर लवप्रीत को हिरासत में ले लिया था। कुरुक्षेत्र के एसपी चंद्र मोहन का दावा है कि चैनल ने ड्रग्स व्यापार से जुड़ा एक छह महीने पुराना वीडियो "फेक लाइव स्टिंग ऑपरेशन" बताकर चलाया, जिसका मकसद ब्लैकमेलिंग करना था।

जांच की मांग और बढ़ता तनाव

दूसरी ओर, मीडिया संस्थान का यह स्पष्ट कहना है कि यह पूरी कार्रवाई उनकी खोजी पत्रकारिता का नतीजा है। उनका आरोप है कि मुख्यमंत्री नायब सैनी के निर्वाचन क्षेत्र में ड्रग्स के मुद्दे पर रिपोर्टिंग करने के कारण उन्हें निशाना बनाया गया और बदले की भावना से यह गिरफ्तारियां की गईं। इस मामले ने अब राजनीतिक और सामाजिक मोड़ ले लिया है। चंडीगढ़ प्रेस क्लब के साथ-साथ भूपेंद्र सिंह हुड्डा और अभय सिंह चौटाला जैसे दिग्गजों ने इसे मीडिया की आजादी पर हमला करार दिया है।

मामले की गंभीरता इस बात से समझी जा सकती है कि बिनैन खाप ने भी इसमें हस्तक्षेप किया है। खाप ने सरकार को 14 अक्टूबर तक का अल्टीमेटम दिया है कि पत्रकारों के खिलाफ दर्ज एफआईआर वापस ली जाए। यदि मांगें पूरी नहीं हुईं, तो 15 अक्टूबर को जींद में एक बड़ी महापंचायत बुलाने की चेतावनी दी गई है। वहीं, फर्रुखाबाद के पत्रकारों ने मांग की है कि इस पूरे प्रकरण की एक स्वतंत्र, निष्पक्ष और समयबद्ध जांच कराई जाए ताकि सच सामने आ सके।

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