इटावा: सिरहौल गांव में गंदगी का अंबार, बदबू और जलभराव से परेशान ग्रामीणों ने खोला मोर्चा
इटावा के सिरहौल गांव में नालियां चोक होने और गंदगी फैलने से ग्रामीण परेशान हैं। प्रशासन की अनदेखी के खिलाफ लोगों ने जताया रोष।

उत्तर प्रदेश के इटावा जिले का सिरहौल गांव इन दिनों नारकीय जीवन जीने को मजबूर है। गांव में फैली भीषण गंदगी और चरमराई सफाई व्यवस्था के कारण स्थानीय निवासियों का जीना मुहाल हो गया है। हालात इतने बदतर हैं कि गांव की नालियां कचरे से पूरी तरह पट चुकी हैं, जिससे गंदा पानी सड़कों पर बह रहा है। इस समस्या से तंग आकर अब ग्रामीणों ने प्रशासन के खिलाफ अपना गुस्सा जाहिर करना शुरू कर दिया है।
गांव की गलियों में चारों तरफ फैली गंदगी से उठने वाली असहनीय बदबू ने लोगों का दम घोंट रखा है। कई जगहों पर नालियां टूट चुकी हैं, जिसकी वजह से सीवेज का पानी सीधे रास्तों पर जमा हो रहा है। इस जलभराव के कारण न केवल राहगीरों को आने-जाने में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है, बल्कि पैदल चलना भी दूभर हो गया है। ग्रामीणों का कहना है कि कचरे के जमा होने से जल निकासी पूरी तरह ठप हो गई है, जिससे पूरा गांव एक तालाब जैसा नजर आने लगा है।
बीमारियों का डर और प्रशासन की अनदेखी
गंदगी और ठहरे हुए पानी को देखकर ग्रामीणों में अब संक्रामक बीमारियों के फैलने का डर बैठ गया है। स्थानीय निवासियों का मानना है कि अगर जल्द ही सफाई नहीं कराई गई, तो गांव में महामारी जैसी स्थिति पैदा हो सकती है। रामस्वरूप, सत्यवीर, ध्रुवेश तोमर, मंजू देवी और सत्य प्रकाश जैसे कई ग्रामीणों ने बताया कि उन्होंने इस समस्या को लेकर संबंधित अधिकारियों को कई बार लिखित और मौखिक शिकायतें दी हैं, लेकिन हर बार उन्हें केवल आश्वासन ही मिला।
ग्रामीणों का आरोप है कि बार-बार गुहार लगाने के बावजूद प्रशासन ने इस ओर कोई ठोस कदम नहीं उठाया है। लोगों में इस बात को लेकर गहरा आक्रोश है कि आखिर उनकी बुनियादी जरूरतों और स्वास्थ्य की अनदेखी क्यों की जा रही है। अब ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही नालियों की मरम्मत और गांव की सफाई नहीं हुई, तो वे बड़े स्तर पर विरोध प्रदर्शन करने को मजबूर होंगे।