पूर्व IAS दिव्या मित्तल ने लॉन्च की 'जन नीति भारत' पार्टी, 2027 यूपी चुनाव में उतरेंगी मैदान में

Shubham Singh15 October 20262 min read0 viewsउत्तर प्रदेश
पूर्व IAS दिव्या मित्तल ने लॉन्च की 'जन नीति भारत' पार्टी, 2027 यूपी चुनाव में उतरेंगी मैदान में

उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक नया चेहरा सामने आया है। 2013 बैच की पूर्व आईएएस अधिकारी दिव्या मित्तल ने आधिकारिक तौर पर अपनी नई राजनीतिक पार्टी 'जन नीति भारत' का ऐलान कर दिया है। गुरुवार, 15 अक्टूबर 2026 को लॉन्च हुई यह पार्टी मुख्य रूप से 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों को लक्ष्य बनाकर बनाई गई है। दिव्या मित्तल खुद मिर्जापुर सदर निर्वाचन क्षेत्र से चुनाव लड़ने की तैयारी में हैं।

दिव्या मित्तल, जो आईआईटी दिल्ली और आईआईएम बेंगलुरु जैसी प्रतिष्ठित संस्थाओं की छात्रा रही हैं, उन्होंने करीब 13 साल तक प्रशासनिक सेवा में अपनी सेवाएं दीं। वह मिर्जापुर, देवरिया और संत कबीर नगर जैसे जिलों में जिलाधिकारी (DM) के तौर पर तैनात रह चुकी हैं। उन्होंने 30 अगस्त 2026 को अपने इस्तीफे की अर्जी दी थी, जिसे 14 सितंबर 2026 को औपचारिक रूप से स्वीकार कर लिया गया।

डिजिटल गवर्नेंस और जनता की भागीदारी पर जोर

दिव्या मित्तल की 'जन नीति भारत' पार्टी का मुख्य उद्देश्य नीति-निर्माण में आम जनता की सीधी भागीदारी सुनिश्चित करना है। उनका मानना है कि सरकार की जवाबदेही केवल चुनाव के समय नहीं, बल्कि पूरे पांच साल के कार्यकाल के दौरान होनी चाहिए। पार्टी ने कुछ बेहद आधुनिक और पारदर्शी वादे किए हैं, जिनमें शामिल हैं:

  • रियल-टाइम डेटा: सरकारी योजनाओं, बजट और विकास कार्यों की सटीक जानकारी सीधे नागरिकों के मोबाइल फोन पर उपलब्ध कराई जाएगी।
  • डिजिटल रेटिंग सिस्टम: स्कूलों, अस्पतालों और सड़कों की गुणवत्ता को मापने के लिए एक कलर-कोडेड (हरा, पीला और लाल) रेटिंग सिस्टम लागू किया जाएगा, जिससे जनता खुद सुविधाओं का मूल्यांकन कर सके।
  • भेदभाव रहित नीतियां: जरूरतों के आधार पर निर्णय लेना और सरकारी कामकाज में पूर्ण पारदर्शिता लाना।
  • महिला सुरक्षा: महिलाओं की सुरक्षा को पार्टी की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में रखा गया है।

दिलचस्प बात यह है कि दिव्या मित्तल पारंपरिक विज्ञापन आधारित प्रचार के बजाय जमीनी स्तर पर डोर-टू-डोर कैंपेनिंग पर भरोसा कर रही हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि फिलहाल पार्टी के पास बहुत बड़ा वित्तीय संसाधन नहीं है, इसलिए वे सीधे लोगों से जुड़कर अपनी बात पहुंचाएंगी। राजनीति में आने से पहले उन्होंने जनता की राय जानने के लिए सोशल मीडिया का सहारा लिया था, जहां जबरदस्त रिस्पॉन्स मिलने के कारण उन्हें फीडबैक लेने के लिए व्हाट्सएप से गूगल फॉर्म पर शिफ्ट होना पड़ा था।

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