शाहजहाँपुर: पूर्व सांसद धर्मेंद्र कश्यप ने छोड़ी भाजपा, पार्टी में अनदेखी और 'दम घुटने' का लगाया आरोप

शाहजहाँपुर: पूर्व सांसद धर्मेंद्र कश्यप ने छोड़ी भाजपा, पार्टी में अनदेखी और 'दम घुटने' का लगाया आरोप

उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बड़ा उलटफेर देखने को मिला है। औनला से दो बार सांसद रह चुके धर्मेंद्र कश्यप ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) से अपना नाता तोड़ लिया है। कश्यप ने पार्टी के भीतर महसूस की जा रही अनदेखी और घुटन को अपना इस्तीफा देने की मुख्य वजह बताया है। उनके इस फैसले से शाहजहाँपुर के राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है।

इस्तीफे से पहले ही धर्मेंद्र कश्यप के तेवर बदल गए थे, जिसका संकेत तब मिला जब उन्होंने अपने सोशल मीडिया प्रोफाइल से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तस्वीर हटा दी। एक मीडिया इंटरव्यू के दौरान कश्यप ने अपनी नाराजगी खुलकर जाहिर की। उन्होंने आरोप लगाया कि जिन लोगों ने उनकी चुनावी हार सुनिश्चित करने के लिए साजिशें रचीं, आज पार्टी नेतृत्व उन्हीं लोगों को सम्मान दे रहा है। इसी मानसिक पीड़ा और उपेक्षा के कारण उन्होंने पार्टी छोड़ने का फैसला किया।

कानून-व्यवस्था और शासन पर उठाए गंभीर सवाल

धर्मेंद्र कश्यप ने केवल पार्टी के आंतरिक विवादों पर ही बात नहीं की, बल्कि राज्य की वर्तमान स्थिति पर भी तीखे प्रहार किए। उन्होंने कानून-व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए पूछा कि क्या सवर्णों, पिछड़ों और दलितों के लिए न्याय के पैमाने अलग-अलग हैं? उन्होंने जोर देकर कहा कि समाज के हर वर्ग को समान न्याय और सम्मान मिलना चाहिए।

राजनीति में धर्म के इस्तेमाल पर कश्यप ने कहा कि शासन का मुख्य उद्देश्य रोटी, कपड़ा, मकान और सम्मान जैसे बुनियादी मुद्दों को प्राथमिकता देना होना चाहिए, न कि केवल धार्मिक दिखावा करना। उन्होंने एक गंभीर चिंता जताते हुए कहा कि एक तरफ स्कूल बंद हो रहे हैं, तो दूसरी तरफ नई शराब की दुकानें खोली जा रही हैं।

2027 के विधानसभा चुनावों का जिक्र करते हुए उन्होंने दावा किया कि राज्य में एक बड़ा राजनीतिक बदलाव आने वाला है। जब उनसे उनके अगले कदम के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने कहा कि वह जल्द ही अपने समर्थकों के साथ एक 'पंचायत' करेंगे और उनके परामर्श के बाद ही तय करेंगे कि उन्हें आगे क्या करना है। फिलहाल उन्होंने किसी अन्य पार्टी में शामिल होने का संकेत नहीं दिया है।

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