देवरिया: चाय-पकोड़े की दुकान से पुलिस की वर्दी तक, दो भाई-बहनों ने रचा इतिहास

Shubham Singh15 October 20262 min read0 viewsउत्तर प्रदेश
देवरिया: चाय-पकोड़े की दुकान से पुलिस की वर्दी तक, दो भाई-बहनों ने रचा इतिहास

कहते हैं कि अगर इरादे मजबूत हों और मेहनत सच्ची हो, तो गरीबी कभी रास्ते का रोड़ा नहीं बनती। ऐसा ही कुछ कर दिखाया है उत्तर प्रदेश के देवरिया जिले के रहने वाले विशाल और प्रीति ने। चाय और पकोड़े की एक छोटी सी दुकान चलाकर परिवार पालने वाले इन दो भाई-बहनों का चयन उत्तर प्रदेश पुलिस में हुआ है। इस खबर ने न केवल उनके परिवार में खुशियां बिखेरी हैं, बल्कि पूरे इलाके के युवाओं के लिए प्रेरणा की एक नई मिसाल पेश की है।

देवरिया के भगलपुर निवासी विशाल और प्रीति चचेरे भाई-बहन हैं। उनका परिवार आर्थिक रूप से काफी कमजोर है और अपनी जीविका के लिए एक छोटे से चाय-पकोड़े के स्टॉल पर निर्भर है। सीमित संसाधनों के बावजूद, दोनों ने अपनी पढ़ाई को प्राथमिकता दी और स्नातक (ग्रेजुएशन) की डिग्री पूरी की। उनकी इस सफलता ने यह साबित कर दिया कि सरकारी नौकरी पाने के लिए महंगी कोचिंग नहीं, बल्कि अटूट संकल्प की जरूरत होती है।

संघर्षों से भरा रहा सफर, मां के साये के बिना प्रीति ने पाई सफलता

इस सफलता के पीछे का संघर्ष बेहद भावुक करने वाला है। प्रीति, जो काशीनाथ गोंड की बेटी हैं, ने अपनी जिंदगी के सबसे कठिन दौर को अपनी ताकत बनाया। कई साल पहले अपनी मां को खोने के बाद, प्रीति के कंधों पर घर की जिम्मेदारी आ गई थी। उन्होंने न केवल अपने पिता की देखभाल की और घर संभाला, बल्कि अपनी पढ़ाई को भी जारी रखा। इसी जज्बे का नतीजा है कि आज वह पुलिस बल का हिस्सा बनने जा रही हैं।

वहीं, रामकिशन के बेटे विशाल ने भी कड़ी मेहनत की। विशाल ने अपनी शुरुआती शिक्षा (कक्षा 1 से 8 तक) भगलपुर की गोल्डन लाइफ चिल्ड्रन एकेडमी से पूरी की, जिसके बाद उन्होंने बीजीएम इंटर कॉलेज से अपनी माध्यमिक और उच्च माध्यमिक शिक्षा प्राप्त की। स्नातक करने के बाद दोनों ने पुलिस भर्ती की तैयारी की और आखिरकार अपनी मंजिल पा ली।

आज जब पूरा क्षेत्र उनकी इस उपलब्धि का जश्न मना रहा है, तो यह कहानी उन हजारों छात्रों को उम्मीद दे रही है जो अभावों के बीच प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हैं।

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