देवरिया: दुर्गा मूर्ति विसर्जन को लेकर प्रशासन अलर्ट, घाटों पर सुरक्षा के कड़े इंतजाम

देवरिया जिले में दुर्गा पूजा और मूर्ति विसर्जन के पर्व को शांतिपूर्ण और सुरक्षित तरीके से संपन्न कराने के लिए प्रशासन ने कमर कस ली है। 16 अक्टूबर से शुरू हुए महाषष्ठी के उत्सव के बाद अब 20 अक्टूबर को विजयादशमी के दिन होने वाले मूर्ति विसर्जन की तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। जिला प्रशासन ने यह सुनिश्चित किया है कि श्रद्धालुओं को किसी भी तरह की असुविधा न हो और सुरक्षा व्यवस्था चाक-चौबंद रहे।
सुरक्षा इंतजामों का जायजा लेने के लिए जिलाधिकारी मधुसूदन हुल्गी और पुलिस अधीक्षक अभिजीत आर. शंकर ने खुद मोर्चा संभाला है। अधिकारियों ने सलेमपुर तहसील के कपरवार घाट और नडावर घाट सहित कई प्रमुख विसर्जन स्थलों का गहन निरीक्षण किया। इस दौरान घाटों पर लाइटिंग, बैरिकेडिंग और ट्रैफिक मैनेजमेंट की बारीकियों को देखा गया ताकि भीड़ को नियंत्रित किया जा सके और कोई अप्रिय घटना न घटे।
सुरक्षा के लिए मजिस्ट्रेटों की तैनाती और विशेष इंतजाम
कानून व्यवस्था को बनाए रखने के लिए जिला प्रशासन ने एक बड़ा प्लान तैयार किया है। जिले के 23 थाना क्षेत्रों में कुल 67 मजिस्ट्रेटों को तैनात किया गया है, जो मौके पर रहकर व्यवस्थाओं की निगरानी करेंगे। विसर्जन स्थलों पर सुरक्षा को और मजबूत करने के लिए होम गार्ड्स और प्रांतीय सशस्त्र बल (PAC) के जवानों की मदद ली जा रही है।
पानी में सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए प्रशासन ने निम्नलिखित इंतजाम किए हैं:
- सभी प्रमुख घाटों पर नावों और प्रशिक्षित गोताखोरों की उपलब्धता।
- वाटर पुलिस की तैनाती और एम्बुलेंस की मौजूदगी।
- चुनकी घाट जैसे क्षेत्रों में क्रेन और जेसीबी जैसी मशीनों की व्यवस्था, ताकि आपात स्थिति में तुरंत कार्रवाई की जा सके।
मुख्य राजस्व अधिकारी चंद्रेष कुमार ने भी भटपररानी क्षेत्र के चुनकी घाट का निरीक्षण कर लॉजिस्टिक जरूरतों को पूरा करने के निर्देश दिए हैं। इसके साथ ही, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देशों का पालन करते हुए डीजे के शोर की सीमा तय की गई है और पर्यावरण नियमों का सख्ती से पालन करने को कहा गया है।
प्रशासन ने पूजा समितियों से भी अपील की है कि वे मूर्तियों की ऊंचाई और पंडालों की जगह के बारे में पहले से समन्वय करें, ताकि सार्वजनिक रास्तों में कोई बाधा न आए। साथ ही, सभी कार्यक्रमों के लिए समय पर परमिट लेने के निर्देश दिए गए हैं ताकि उत्सव बिना किसी रुकावट के संपन्न हो सके।