दिल्ली-वाराणसी बुलेट ट्रेन को पीएम मोदी की मंजूरी, अब चंद घंटों में तय होगा सफर
पीएम मोदी ने दिल्ली-वाराणसी हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर को मंजूरी दी है। जानें रूट, स्टेशनों की लिस्ट और यात्रा में होने वाली समय की बचत।

देश के बुनियादी ढांचे में एक बड़ा बदलाव होने जा रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दिल्ली-वाराणसी हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर प्रोजेक्ट को अपनी आधिकारिक मंजूरी दे दी है। रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने इस बड़ी घोषणा को साझा करते हुए बताया कि यह प्रोजेक्ट 'नर्दर्न कॉरिडोर' का एक अहम हिस्सा होगा, जो न केवल दिल्ली और वाराणसी को जोड़ेगा, बल्कि उत्तर भारत के कई बड़े शहरों के बीच की दूरी को काफी कम कर देगा।
1.71 लाख करोड़ की लागत और 13 स्टेशनों का जाल
इस महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट पर करीब 1.71 लाख करोड़ रुपये (18 बिलियन अमेरिकी डॉलर) खर्च किए जाएंगे। भारतीय रेलवे और नेशनल हाई-स्पीड रेल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (NHSRCL) द्वारा लागू किए जाने वाले इस कॉरिडोर को साल 2041 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। इस रूट पर कुल 13 स्टेशन बनाए जाएंगे, जिनमें दिल्ली, नोएडा, जेवर एयरपोर्ट, मथुरा, आगरा, फिरोजाबाद, इटावा, कन्नौज, लखनऊ, अयोध्या, रायबरेली, प्रयागराज और न्यू भदोही शामिल हैं।
इस बुलेट ट्रेन के शुरू होने के बाद यात्रा के समय में भारी कमी आएगी। दिल्ली से वाराणसी का सफर, जो पहले कई घंटे लेता था, अब मात्र 3 घंटे और 33 मिनट में पूरा हो सकेगा। इसी तरह दिल्ली से आगरा सिर्फ 59 मिनट में, कानपुर 1 घंटे 45 मिनट में और लखनऊ 2 घंटे 12 मिनट में पहुंचा जा सकेगा। रेल मंत्री के अनुसार, यह कनेक्टिविटी मध्यमवर्गीय परिवारों, युवाओं और छोटे व्यापारियों के साथ-साथ MSME सेक्टर के लिए वरदान साबित होगी।
इसी कड़ी में एक और महत्वपूर्ण अपडेट यह है कि वाराणसी में गंगा नदी पर 2.5 किलोमीटर लंबा डबल-डेकर 'नमो ब्रिज' भी बनाया जा रहा है। 2,657 करोड़ रुपये की लागत वाला यह पुल 2029 तक बनकर तैयार हो जाएगा, जिससे काशी रेलवे स्टेशन, काशी विश्वनाथ मंदिर और नमो घाट तक पहुंचना बेहद आसान हो जाएगा। वहीं, रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने वाराणसी से नई दिल्ली के लिए पहली वंदे भारत स्लीपर ट्रेन को भी हरी झंडी दिखाकर रवाना किया है।