कानपुर में नकली सीमेंट रैकेट का भंडाफोड़, सरकारी प्रोजेक्ट्स में घटिया माल की सप्लाई

Shubham Singh16 October 20262 min read0 viewsउत्तर प्रदेश
कानपुर में नकली सीमेंट रैकेट का भंडाफोड़, सरकारी प्रोजेक्ट्स में घटिया माल की सप्लाई

उत्तर प्रदेश के कानपुर में एक ऐसे बड़े फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ है जिसने सरकारी निर्माण कार्यों की मजबूती पर सवाल खड़े कर दिए हैं। शहर में नामी कंपनियों के डीलरशिप का सहारा लेकर एक्सपायर्ड और जम चुके सीमेंट को नए पैकेट में भरकर बेचने वाले एक शातिर गिरोह को पकड़ा गया है। यह गिरोह न केवल आम लोगों को ठग रहा था, बल्कि सरकारी बुनियादी ढांचा परियोजनाओं में भी घटिया निर्माण सामग्री की सप्लाई कर रहा था।

जांच में सामने आया है कि इस रैकेट के तार कानपुर के नीरज और धीरज गुप्ता के साथ-साथ मेरठ के सुनील और निशांत मित्तल से जुड़े हुए हैं। ये लोग ACC और अंबुजा जैसे बड़े ब्रांड्स की डीलरशिप का इस्तेमाल ढाल की तरह कर रहे थे ताकि किसी को शक न हो। यह गिरोह बुंदेलखंड क्षेत्र में नीलामी के जरिए एक्सपायर्ड और बेहद खराब क्वालिटी का सीमेंट महज 10 से 20 रुपये प्रति बैग की कीमत पर खरीदता था।

30 रुपये का सीमेंट 280 में बेचा, एयरपोर्ट प्रोजेक्ट्स में भी सप्लाई

इस धोखाधड़ी का तरीका बेहद चौंकाने वाला था। बंद कमरों और गोदामों में मिक्सर मशीनों के जरिए उस जमे हुए सीमेंट को प्रोसेस किया जाता था और फिर उसे ब्रांडेड कंपनियों की नई बोरियों में भरकर बाजार में उतारा जाता था। जिस एक बैग को तैयार करने में गिरोह का खर्च करीब 30 रुपये आता था, उसे बाजार में 250 से 280 रुपये के बीच बेचा जा रहा था। बताया जा रहा है कि यह गिरोह हर महीने करीब 30 हजार बैग नकली सीमेंट की सप्लाई कर रहा था।

सबसे गंभीर बात यह है कि इस घटिया सीमेंट की सप्लाई उन ठेकेदारों को की गई जो एयरपोर्ट प्रोजेक्ट्स और 10 जिलों में चल रही 'मुख्यमंत्री ग्रीन रोड इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट' (CM GRID) योजना पर काम कर रहे हैं। अब प्रशासन इस बात की गहन जांच कर रहा है कि इन सरकारी प्रोजेक्ट्स में कितना घटिया माल इस्तेमाल हुआ है। अधिकारियों द्वारा निर्माण सामग्री की क्वालिटी टेस्टिंग और डीलरशिप के दस्तावेजों की ऑडिट की जा रही है ताकि इस पूरे घोटाले की गहराई का पता लगाया जा सके।

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