लखनऊ: डिप्टी सीएम आवास पर एएनएम कर्मियों का जोरदार प्रदर्शन, पुलिस ने हटाया

राजधानी लखनऊ में कॉन्ट्रैक्ट और आउटसोर्सिंग पर तैनात एएनएम (ANM) कर्मियों का गुस्सा फूट पड़ा। अपनी मांगों को लेकर ये कर्मी उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री और स्वास्थ्य मंत्री ब्रजेश पाठक के राजभवन कॉलोनी स्थित आवास के बाहर पहुंच गए और जोरदार प्रदर्शन किया। यह विरोध प्रदर्शन केवल एक दिन का नहीं है, बल्कि ये कर्मी अपनी मांगों को लेकर पिछले कई दिनों से संघर्ष कर रहे हैं।
प्रदर्शन कर रहे कर्मियों का कहना है कि वे 21 सितंबर से ही अपनी आवाज उठा रहे हैं। इनमें से कुछ कर्मी तो पिछले 22 दिनों से प्रदर्शन में जुटे हैं, जबकि कुछ पिछले छह दिनों से लगातार लखनऊ में डटे हुए हैं। इन स्वास्थ्य कर्मियों की सबसे बड़ी पीड़ा यह है कि वे पिछले 5 से 20 वर्षों तक कॉन्ट्रैक्ट पर काम कर रहे हैं, लेकिन उन्हें अभी भी नियमित नहीं किया गया है।
न्यूनतम मानदेय और नियमितीकरण की मांग
प्रदर्शनकारियों ने अपनी मांगों को लेकर सरकार के प्रति गहरा रोष जताया। उनकी मुख्य मांगें निम्नलिखित हैं:
- सभी कॉन्ट्रैक्ट कर्मियों का नियमितीकरण किया जाए।
- 'समान काम, समान वेतन' के सिद्धांत को लागू किया जाए।
- कर्मियों का तबादला उनके गृह जिले में किया जाए।
कर्मियों का आरोप है कि उन्हें हर महीने केवल 10,000 रुपये का मानदेय दिया जा रहा है, जो आज की महंगाई में बेहद कम है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक उनकी शिकायतों पर ध्यान नहीं दे रहे हैं और यहां तक कि उन्होंने इस पेशेवर समूह को पहचानने से भी इनकार किया। हालांकि 9 सितंबर को एक बैठक हुई थी जिसमें समाधान का आश्वासन मिला था, लेकिन एएनएम कर्मियों का दावा है कि कई ज्ञापन देने के बावजूद उनकी समस्याओं का कोई हल नहीं निकला।
12 अक्टूबर को जब प्रदर्शन उग्र हुआ और उपमुख्यमंत्री के आवास पर तनाव बढ़ा, तो उत्तर प्रदेश पुलिस ने हस्तक्षेप किया। पुलिस ने बल प्रयोग करते हुए प्रदर्शनकारियों को वहां से हटाया और उन्हें इको गार्डन भेज दिया।
गुस्साए स्वास्थ्य कर्मियों ने राज्य सरकार को चेतावनी दी है कि यदि उनकी सेवा शर्तों में सुधार नहीं किया गया और उन्हें स्थायी रोजगार नहीं मिला, तो प्रशासन को 2027 के विधानसभा चुनावों में इसका बड़ा खामियाजा भुगतना पड़ेगा।