इमरजेंसी पर बोले सीएम योगी: 1975 ने सिखाया 'रूल ऑफ लॉ' और 'रूल बाय लॉ' के बीच का अंतर

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने देश के राजनीतिक और संवैधानिक इतिहास के काले पन्नों को याद करते हुए कानून की सर्वोच्चता पर जोर दिया है। लखनऊ स्थित डॉ. राम मनोहर लोहिया नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी के पांचवें दीक्षांत समारोह में छात्रों को संबोधित करते हुए सीएम योगी ने 1975 में लगी इमरजेंसी का जिक्र किया और बताया कि कैसे वह दौर भारतीय लोकतंत्र के लिए एक बड़ा सबक था।
मुख्यमंत्री ने छात्रों को संबोधित करते हुए कहा कि 1975 की इमरजेंसी ने पूरे देश को 'रूल ऑफ लॉ' (कानून का शासन) और 'रूल बाय लॉ' (कानून के जरिए शासन) के बीच के बुनियादी अंतर को समझाया। उन्होंने उस समय की परिस्थितियों को याद दिलाते हुए कहा कि जिस उत्तर प्रदेश के हाई कोर्ट ने 12 जून को देश की सबसे शक्तिशाली कुर्सी पर बैठे व्यक्ति के चुनाव को रद्द किया था, उसके ठीक 13 दिन बाद बदले की भावना से देश में आपातकाल थोप दिया गया।
जस्टिस हंस राज खन्ना के साहस और मोदी सरकार के सुधारों का जिक्र
सीएम योगी ने सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जस्टिस हंस राज खन्ना की बेबाकी की सराहना की। उन्होंने कहा कि उस कठिन समय में जस्टिस खन्ना अकेले ऐसे व्यक्ति थे जिन्होंने अपनी असहमति जताई और इसके लिए उन्हें भारी कीमत भी चुकानी पड़ी। हालांकि, इतिहास गवाह है कि सच्चाई की जीत होती है और साल 2017 में सुप्रीम कोर्ट ने जस्टिस खन्ना की उसी असहमति को सही माना।
कानून के छात्रों को प्रेरित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि कानूनी चर्चाओं में केसवानंद भारती और पुट्टास्वामी जैसे ऐतिहासिक मामलों का जिक्र अक्सर होता है, जो संवैधानिक मूल्यों को समझने के लिए जरूरी हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में हुए बड़े बदलावों की भी चर्चा की।
सीएम योगी ने 16 मई 2014 की तारीख को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि 30 साल बाद किसी एक पार्टी को पूर्ण बहुमत मिला और देश में सुधारों का दौर शुरू हुआ। उन्होंने अनुच्छेद 370 को हटाए जाने का उदाहरण देते हुए कहा कि इससे 'एक देश, एक संविधान, एक झंडा और एक प्रमुख' का सिद्धांत मजबूत हुआ, जिसे सुप्रीम कोर्ट ने भी सही ठहराया।
अंत में उन्होंने स्पष्ट किया कि सुधार का मतलब केवल नए कानून बनाना नहीं है, बल्कि उन पुराने और अप्रासंगिक कानूनों को हटाना भी है जो अब काम के नहीं रहे। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने इस प्रक्रिया की शुरुआत की है और आज पूरा देश इसके सकारात्मक परिणाम देख रहा है।