RMLNLU दीक्षांत समारोह: सीएम योगी ने कानून के शासन और संवैधानिक मूल्यों पर दिया जोर

Sushant Singh17 October 20262 min read0 viewsउत्तर प्रदेश
RMLNLU दीक्षांत समारोह: सीएम योगी ने कानून के शासन और संवैधानिक मूल्यों पर दिया जोर

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शनिवार को लखनऊ स्थित डॉ. राम मनोहर लोहिया नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी (RMLNLU) के पांचवें दीक्षांत समारोह में शिरकत की। विश्वविद्यालय के डॉ. भीमराव अंबेडकर ऑडिटोरियम में आयोजित इस गरिमामय कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने नए स्नातकों को संबोधित करते हुए भारत के संवैधानिक इतिहास और कानूनी मील के पत्थरों पर विस्तार से चर्चा की। इस मौके पर 260 छात्रों को उनकी डिग्रियां प्रदान की गईं, जिनमें 173 बीए एलएलबी (ऑनर्स), 47 एलएलएम और कई पीएचडी व पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा धारक शामिल थे। साथ ही, मेधावी छात्रों को 11 स्वर्ण, 5 रजत और 5 कांस्य सहित कुल 21 पदक देकर सम्मानित किया गया।

कानून का शासन बनाम कानून द्वारा शासन

समारोह को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 1975 के आपातकाल का जिक्र किया और कहा कि उस दौर ने देश को 'कानून के शासन' (Rule of Law) और 'कानून द्वारा शासन' (Rule by Law) के बीच का बुनियादी अंतर सिखाया। उन्होंने पूर्व सुप्रीम कोर्ट जस्टिस हंस राज खन्ना के साहस की सराहना की, जिन्होंने आपातकाल के दौरान अपनी असहमति दर्ज कराई थी। सीएम ने याद दिलाया कि इलाहाबाद हाईकोर्ट द्वारा चुनाव रद्द किए जाने के महज 13 दिन बाद आपातकाल लगाया गया था, और यह भी बताया कि 2017 में सुप्रीम कोर्ट ने जस्टिस खन्ना की उस समय की असहमति को सही ठहराया।

मुख्यमंत्री ने कानूनी विमर्श में केशवानंद भारती और पुट्टास्वामी जैसे ऐतिहासिक मामलों के महत्व को रेखांकित किया। इसके अलावा, उन्होंने अनुच्छेद 370 के हटने को एक बड़ी उपलब्धि बताया। राज्य की कानून व्यवस्था पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि 'डबल इंजन सरकार' की जीरो टॉलरेंस नीति की वजह से आज उत्तर प्रदेश में अपराध मुक्त और भयमुक्त वातावरण बना है, जिससे कानून का शासन पूरी तरह स्थापित हुआ है।

सीएम योगी ने 'विकसित भारत@2047' के विजन का जिक्र करते हुए कहा कि जो लोग यथास्थितिवादी मानसिकता रखते हैं, वे देश की प्रगति में सबसे बड़ी बाधा हैं। उन्होंने राज्य में महिला श्रम बल की बढ़ती भागीदारी को भी एक सकारात्मक बदलाव के रूप में पेश किया। इस कार्यक्रम में सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस विक्रम नाथ, इलाहाबाद हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश अरुण भंसाली और उच्च शिक्षा मंत्री योगेंद्र उपाध्याय भी मौजूद रहे।

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