चित्रकूट: खेती रोकने पर भड़के आदिवासी, वन विभाग के खिलाफ माणिकपुर तहसील में जोरदार प्रदर्शन

Sushant Singh17 October 20262 min read0 viewsउत्तर प्रदेश
चित्रकूट: खेती रोकने पर भड़के आदिवासी, वन विभाग के खिलाफ माणिकपुर तहसील में जोरदार प्रदर्शन

उत्तर प्रदेश के चित्रकूट जिले में वन विभाग और स्थानीय आदिवासियों के बीच जमीन को लेकर विवाद गहरा गया है। शनिवार, 17 अक्टूबर को माणिकपुर तहसील परिसर में सैकड़ों की संख्या में आदिवासी ग्रामीणों ने इकट्ठा होकर वन विभाग के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि वन विभाग उन्हें उनकी अपनी ही जमीन पर जुताई और बुवाई करने से रोक रहा है, जिससे उनके सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है।

गुस्साए ग्रामीणों ने उपजिलाधिकारी (एसडीएम) को एक औपचारिक शिकायत सौंपी है। उनका कहना है कि वे कई वर्षों से इस जमीन पर खेती कर रहे हैं और कई परिवार वहीं झोपड़ियों में रहकर अपना जीवन यापन कर रहे हैं। ग्रामीणों ने प्रशासन को बताया कि बुवाई का यह सबसे सही समय है और अगर उन्हें अभी खेती करने से रोका गया, तो पूरे साल उनके परिवारों के सामने खाने के लाले पड़ जाएंगे। खेती और मजदूरी ही उनकी आय का एकमात्र जरिया है, जिसे अब वन विभाग की बाधाओं के कारण खतरा पैदा हो गया है।

आजीविका बचाने की मांग और चेतावनी

प्रदर्शन कर रहे आदिवासियों ने प्रशासन से मांग की है कि वन विभाग और राजस्व विभाग के रिकॉर्ड की जांच कर जमीन की स्थिति स्पष्ट की जाए, ताकि इस विवाद का निष्पक्ष समाधान निकल सके। इस विरोध प्रदर्शन के दौरान जन अधिकार पार्टी के प्रदेश सचिव और माणिकपुर के पूर्व विधानसभा प्रत्याशी एडवोकेट शिवपूजन कोल भी मौजूद रहे।

शिवपूजन कोल ने कड़े शब्दों में कहा कि गरीब आदिवासी परिवारों का उत्पीड़न और शोषण किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने जोर देकर कहा कि ये लोग जीवित रहने के लिए पूरी तरह खेती पर निर्भर हैं और उनकी समस्याओं का तुरंत समाधान होना चाहिए। कोल ने चेतावनी दी कि यदि प्रशासन ने जल्द ही इस अन्याय को नहीं रोका और ग्रामीणों को उनके अधिकार नहीं मिले, तो वे अपनी आजीविका बचाने के लिए एक निर्णायक संघर्ष शुरू करेंगे।

एसडीएम को सौंपे गए ज्ञापन में मांग की गई है कि सरकारी स्तर पर तुरंत हस्तक्षेप किया जाए ताकि कानूनी दायरे में रहकर किसान अपनी खेती दोबारा शुरू कर सकें और उन्हें आर्थिक तंगी से बचाया जा सके।

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