चित्रकूट: ब्रिटिशकालीन बांध टूटने से मचा हड़कंप, 7 गांवों पर मंडराया खतरा

चित्रकूट के मौ इलाके में ब्रिटिश काल का पुराना बांध टूटने से 7 गांवों पर खतरा मंडरा रहा है। सिंचाई विभाग पर लापरवाही के आरोप लगे हैं।

Shubham Singh26 October 20262 min read0 viewsउत्तर प्रदेश
चित्रकूट: ब्रिटिशकालीन बांध टूटने से मचा हड़कंप, 7 गांवों पर मंडराया खतरा

उत्तर प्रदेश के चित्रकूट जिले के मौ इलाके में एक बड़ा हादसा सामने आया है। यहाँ औझर गांव में स्थित ब्रिटिश काल का एक पुराना छोटा बांध टूट गया है, जिससे आसपास के सात गांवों में बाढ़ का खतरा पैदा हो गया है। चित्रकूट बांध टूटना स्थानीय किसानों के लिए बड़ी चिंता का विषय बन गया है, क्योंकि उन्हें डर है कि उनकी तैयार फसलें पूरी तरह बर्बाद हो सकती हैं।

करीब 100 सालों से काम कर रहा यह ऐतिहासिक बांध अब ढह चुका है। इस घटना के बाद स्थानीय ग्रामीणों का गुस्सा फूट पड़ा है और उन्होंने सिंचाई विभाग पर गंभीर लापरवाही के आरोप लगाए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि अगर विभाग समय रहते मरम्मत का काम करता, तो इस आपदा को टाला जा सकता था। हालांकि, साल 2007 में इस बांध का नवीनीकरण और कुछ नया निर्माण कराया गया था, लेकिन लोगों का दावा है कि उसके बाद विभाग ने बांध के गेटों की निगरानी और रखरखाव पर कोई ध्यान नहीं दिया।

प्रशासन अलर्ट, पुलिस ने संभाला मोर्चा

स्थिति की गंभीरता को देखते हुए मौ के थाना प्रभारी (SHO) भारी पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे हैं। प्रशासन अब लाउडस्पीकर के जरिए लोगों को चेतावनी दे रहा है और उन्हें सुरक्षित स्थानों पर जाने की सलाह दी जा रही है ताकि किसी भी तरह की जनहानि को रोका जा सके।

गौरतलब है कि चित्रकूट जिला इस साल मानसून के दौरान पानी के बुनियादी ढांचे की समस्याओं से बुरी तरह जूझ रहा है। इससे पहले गोरघी बांध टूटने से भारी तबाही मची थी, जिसमें रामघाट पुल बह गया था और 36 गांवों के करीब 15,000 लोग प्रभावित हुए थे। उस समय मंदाकिनी नदी के रिकॉर्ड स्तर तक बढ़ने से 700 से अधिक ग्रामीणों को रेस्क्यू करना पड़ा था। हालांकि सरकार ने उस समय 450 पीड़ितों को करीब 41 लाख रुपये की सहायता दी थी, लेकिन औझर गांव की इस ताजा घटना ने एक बार फिर पुराने बांधों की मजबूती पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

Share:

Comments

Leave a comment