चंदौली: एक्सपायर्ड इंजेक्शन लगाने का आरोप, क्लिनिक पर परिजनों का हंगामा

चंदौली के दुल्हीपुर में एक क्लिनिक पर मेडिकल लापरवाही का आरोप। परिजनों का दावा है कि एक्सपायर्ड इंजेक्शन से मरीज की हालत बिगड़ी।

Sushant Singh1 November 20262 min read0 viewsउत्तर प्रदेश
चंदौली: एक्सपायर्ड इंजेक्शन लगाने का आरोप, क्लिनिक पर परिजनों का हंगामा

उत्तर प्रदेश के चंदौली जिले के दुल्हीपुर इलाके से मेडिकल लापरवाही का एक गंभीर मामला सामने आया है। यहां एक स्थानीय क्लिनिक पर इलाज के दौरान मरीज की हालत बिगड़ने के बाद परिजनों ने जमकर हंगामा किया। परिजनों का सीधा आरोप है कि डॉक्टर ने गलत निदान किया और मरीज को एक्सपायर्ड इंजेक्शन लगा दिया, जिससे उसकी सेहत और ज्यादा खराब हो गई।

पूरा मामला महामलपुर निवासी निखिल श्रीवास्तव की पत्नी से जुड़ा है। परिजनों के मुताबिक, बुखार होने पर वे अपनी पत्नी को डॉक्टर समीर अहमद के क्लिनिक पर ले गए थे। बुखार ठीक होने के बाद जब पेट में दर्द शुरू हुआ, तो डॉक्टर ने अल्ट्रासाउंड और ब्लड टेस्ट की सलाह दी। परिवार का दावा है कि रिपोर्ट्स में पैंक्रियाज (अग्न्याशय) सामान्य था, लेकिन डॉक्टर ने इसे समस्या बताकर एक इंजेक्शन लगा दिया। आरोप है कि वह इंजेक्शन एक्सपायर्ड था, जिसके बाद मरीज की तबीयत तेजी से गिरने लगी।

बनारस और मुगलसराय में जांच के बाद खुला सच

परिजनों ने बताया कि जब उन्होंने बनारस और मुगलसराय में अन्य डॉक्टरों से जांच कराई, तो वहां पैंक्रियाज बिल्कुल सामान्य पाया गया। शनिवार को मरीज का ब्लड प्रेशर अचानक गिर गया और वह बेहोश हो गई, जिसके बाद उसे इमरजेंसी में भर्ती कराना पड़ा। परिवार का कहना है कि अब तक इलाज में 25 से 30 हजार रुपये खर्च हो चुके हैं, लेकिन मरीज की हालत अब भी नाजुक बनी हुई है।

इस मामले में एक और चौंकाने वाला मोड़ तब आया जब परिजनों ने बताया कि पहले स्थानीय पुलिस स्टेशन में शिकायत की गई थी। वहां डॉक्टर और परिवार के बीच एक समझौता हुआ था, जिसमें डॉक्टर ने लिखित माफी मांगने और इलाज का खर्च उठाने का वादा किया था। लेकिन आरोप है कि डॉक्टर ने अपनी बात पूरी नहीं की, जिसके बाद शनिवार को क्लिनिक पर भारी हंगामा हुआ।

पीड़ित परिवार अब इलाज के पूरे खर्च की भरपाई, मुआवजे और डॉक्टर से सार्वजनिक माफी की मांग कर रहा है। इस बीच, मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) परितोष मिश्रा ने मामले का संज्ञान लेते हुए शिकायतकर्ताओं को सबूतों के साथ लिखित आवेदन देने का निर्देश दिया है, ताकि औपचारिक जांच कर उचित कार्रवाई की जा सके। हालांकि, इस पूरे मामले पर डॉक्टर समीर अहमद का पक्ष अभी सामने नहीं आया है।

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