चंदौली: क्या बदल गए शराब तस्करों के ठिकाने? मुगलसराय और सकलडीहा में बढ़ी हलचल

Shubham Singh18 October 20262 min read0 viewsउत्तर प्रदेश
चंदौली: क्या बदल गए शराब तस्करों के ठिकाने? मुगलसराय और सकलडीहा में बढ़ी हलचल

बिहार में शराबबंदी के बावजूद उत्तर प्रदेश के सीमावर्ती जिले चंदौली में अवैध शराब की तस्करी का खेल थमने का नाम नहीं ले रहा है। हाल के दिनों में जिले के कुछ खास इलाकों में तस्करी की गतिविधियों में आए बदलाव ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। खासकर चंदौली शराब तस्करी के पुराने केंद्रों और नए उभरते हॉटस्पॉट्स के बीच का अंतर अब चर्चा का विषय बन गया है।

बता दें कि अब तक डीडीयू जंक्शन, मुगलसराय शहरी क्षेत्र, सकलडीहा और तुलसी आश्रम जैसे इलाके शराब तस्करी के मुख्य केंद्र रहे हैं। लेकिन अब स्थिति कुछ अलग नजर आ रही है। ताजा रिपोर्ट्स के मुताबिक, सकलडीहा और तुलसी आश्रम के इलाकों में तस्करी की गतिविधियां अब भी सक्रिय हैं, जबकि डीडीयू जंक्शन और मुगलसराय शहर से शराब बरामदगी की खबरों में भारी कमी आई है।

बरामदगी में कमी या तस्करों की नई चाल?

मुगलसराय और डीडीयू जंक्शन जैसे व्यस्त इलाकों से बरामदगी कम होने के बाद स्थानीय स्तर पर अटकलें तेज हो गई हैं। सवाल यह उठ रहा है कि क्या पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों ने इन इलाकों में तस्करी पर पूरी तरह लगाम लगा दी है, या फिर तस्करों ने अपनी कार्यप्रणाली और रास्तों को बदल लिया है? जानकारों का मानना है कि केवल बरामदगी के आंकड़ों में कमी आने का मतलब यह नहीं है कि अवैध कारोबार खत्म हो गया है।

इस पूरे मामले में स्थानीय पुलिस, जीआरपी (GRP) और आरपीएफ (RPF) की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं। यह चर्चा का विषय है कि क्या सुरक्षा एजेंसियां केवल मौके पर बरामदगी करने तक सीमित हैं या वे तस्करी के उस बड़े नेटवर्क को ध्वस्त करने की कोशिश कर रही हैं जो इस पूरे खेल को चलाता है।

अब मांग की जा रही है कि प्रशासन को सभी क्षेत्रों में की गई चेकिंग, जब्ती के रिकॉर्ड और दर्ज किए गए मामलों का पारदर्शी विवरण सार्वजनिक करना चाहिए। विशेषज्ञों का कहना है कि जब तक तस्करी के रूट और उनके पीछे काम करने वाले सिंडिकेट की पहचान नहीं होगी, तब तक इस अवैध व्यापार को पूरी तरह रोकना संभव नहीं है। अब देखना यह है कि प्रशासन इन बदलते पैटर्न्स को रोकने के लिए क्या ठोस कदम उठाता है।

Share:

Comments

Leave a comment