चन्दौली: DDU नगर MRF प्लांट में मिला बायोमेडिकल वेस्ट, जांच की मांग तेज

Shubham Singh16 October 20262 min read0 viewsउत्तर प्रदेश

उत्तर प्रदेश के चन्दौली जिले में पंडित दीनदयाल उपाध्याय (DDU) नगर के मैटेरियल रिकवरी फैसिलिटी (MRF) प्लांट में अस्पतालों के खतरनाक बायोमेडिकल वेस्ट मिलने की खबर से हड़कंप मच गया है। आरोप है कि नगर परिषद के सामान्य कचरे के साथ अस्पतालों से निकलने वाला संक्रामक कचरा भी यहां डंप किया जा रहा है, जिससे न केवल पर्यावरण को खतरा है बल्कि सफाई कर्मियों की जान भी जोखिम में पड़ गई है।

शहर से करीब सात किलोमीटर दूर जमुनीपुर गांव के पास एक हेक्टेयर जमीन पर स्थित यह प्लांट नगर परिषद के 25 वार्डों से आने वाले कचरे की छंटाई और रीसाइक्लिंग के लिए बनाया गया है। रोजाना करीब 246 आउटसोर्स सफाई कर्मचारी लगभग पांच टन कचरा इकट्ठा कर यहां लाते हैं। अब यह बात सामने आ रही है कि इस सामान्य कचरे के बीच इस्तेमाल की गई सिरिंज, सुइयां और खून से सनी पट्टियां जैसी खतरनाक चीजें मिली हैं, जो सीधे तौर पर स्वास्थ्य नियमों का उल्लंघन है।

नियमों की अनदेखी और स्वास्थ्य का खतरा

बायोमेडिकल वेस्ट मैनेजमेंट रूल्स 2016 के तहत यह अनिवार्य है कि स्वास्थ्य संस्थान अपने कचरे को अलग-अलग श्रेणियों में बांटें और उसे अधिकृत माध्यम से ही डिस्पोज करें। लेकिन DDU नगर के इस प्लांट में बायोमेडिकल वेस्ट का मिलना यह संकेत देता है कि या तो अस्पताल नियमों की धज्जियां उड़ा रहे हैं या कचरा परिवहन व्यवस्था में बड़ी लापरवाही बरती जा रही है।

इस गंभीर स्थिति को देखते हुए जनहित कार्यकर्ताओं ने प्रशासन से तुरंत हस्तक्षेप की मांग की है। मांग की गई है कि DDU नगर नगर पालिका प्रशासन, मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) और उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड मिलकर इस पूरे मामले की गहन जांच करें। जांच में इस बात का पता लगाया जाना जरूरी है कि यह कचरा किस अस्पताल से आ रहा है, वाहनों का ट्रांजिट लॉग क्या है और इस लापरवाही के लिए कौन जिम्मेदार है।

विशेषज्ञों का कहना है कि यदि समय रहते इस पर लगाम नहीं लगाई गई, तो यह संक्रामक कचरा आसपास के निवासियों और सफाई कर्मियों के लिए किसी बड़ी महामारी या गंभीर बीमारी का कारण बन सकता है। अब सबकी नजरें प्रशासनिक कार्रवाई पर टिकी हैं।

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