लखनऊ में वेतन विसंगति पर प्रदर्शन कर रहे बॉन्डेड एमबीबीएस डॉक्टर हिरासत में

राजधानी लखनऊ के हजरतगंज इलाके में गांधी प्रतिमा के पास वेतन विसंगति और बकाया भुगतान की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रहे बॉन्डेड एमबीबीएस डॉक्टरों को पुलिस ने जबरन हिरासत में ले लिया है। 2018, 2019 और 2020 बैच के ये डॉक्टर पिछले 40 दिनों से अपनी मांगों को लेकर संघर्ष कर रहे हैं, लेकिन मामला तब तनावपूर्ण हो गया जब पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को जबरन बसों में भरकर इको गार्डन डिटेंशन सेंटर भेज दिया।
इन डॉक्टरों की मुख्य मांग 'वन बॉन्ड, वन सैलरी' नीति लागू करना है, ताकि समान कार्य के लिए समान वेतन मिल सके। वर्तमान स्थिति यह है कि सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (CHC) और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों (PHC) में तैनात बॉन्डेड डॉक्टरों को महीने के 50,000 से 65,000 रुपये मिलते हैं, जबकि मेडिकल कॉलेजों में कार्यरत डॉक्टरों का वेतन 1 लाख रुपये या उससे अधिक है। डॉक्टरों का आरोप है कि स्वास्थ्य मंत्री ब्रजेश पाठक ने 2 सितंबर को उनसे मुलाकात कर 24 घंटे के भीतर सरकारी आदेश जारी करने का वादा किया था, जो अब तक पूरा नहीं हुआ है।
पुलिसिया कार्रवाई और राजनीतिक प्रतिक्रिया
प्रदर्शन के दौरान माहौल काफी गरमा गया। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में डॉक्टरों और पुलिस के बीच तीखी बहस देखी जा सकती है, जिसमें प्रदर्शनकारियों ने एक आईपीएस अधिकारी पर धमकी देने का आरोप लगाया है। विरोध जताने के लिए महिला डॉक्टरों ने पुलिस वाहनों के सामने लेटकर अपना विरोध दर्ज कराया। गौरतलब है कि अनिवार्य सेवा नियमों के तहत एमबीबीएस स्नातकों को दो साल सरकारी सेवा देनी होती है, अन्यथा उन्हें 10 लाख रुपये का जुर्माना भरना पड़ता है।
इस पूरे घटनाक्रम और पुलिस की कार्रवाई पर समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। उन्होंने चिकित्सा पेशेवरों के खिलाफ की गई इस पुलिसिया कार्रवाई की सार्वजनिक रूप से निंदा की है। अब ये डॉक्टर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से सीधे हस्तक्षेप की मांग कर रहे हैं ताकि उनकी वेतन संबंधी समस्याओं का समाधान हो सके।