ब्लू ड्रम मर्डर केस: मौत की सजा के खिलाफ इलाहाबाद हाई कोर्ट पहुंचे दोषी
मर्चेंट नेवी ऑफिसर सौरभ राजपूत हत्याकांड के दोषियों ने इलाहाबाद हाई कोर्ट में मौत की सजा को चुनौती दी है। जानें पूरा मामला।

मर्चेंट नेवी ऑफिसर सौरभ राजपूत की बेरहमी से हत्या के मामले में मौत की सजा पाने वाले दोषियों ने अब राहत की उम्मीद में इलाहाबाद हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। 'ब्लू ड्रम मर्डर केस' के नाम से चर्चित इस खौफनाक वारदात के दोषियों, मुस्कान रस्तोगी और साहिल शुक्ला ने संयुक्त अपील दायर कर अपनी सजा और दोषसिद्धि को रद्द करने की मांग की है। इस मामले की सुनवाई अगले हफ्ते हाई कोर्ट की डिवीजन बेंच द्वारा की जाएगी।
यह पूरा मामला तब सामने आया था जब मार्च 2025 में एक नीले रंग के ड्रम के अंदर सीमेंट से भरे हुए शरीर के टुकड़े मिले थे। इस सनसनीखेज वारदात ने पूरे इलाके को दहला दिया था। मेरठ की जिला और सत्र अदालत के जिला जज अरविंद कुमार मिश्रा ने 14 अक्टूबर 2026 को इस मामले में अपना फैसला सुनाया था। अदालत ने इस हत्याकांड को 'दुर्लभ से दुर्लभतम' (rarest of rare) श्रेणी में रखते हुए दोनों दोषियों को फांसी की सजा सुनाई थी।
अदालत ने लगाया भारी जुर्माना और दी कड़ी चेतावनी
ट्रायल कोर्ट ने न केवल मौत की सजा सुनाई, बल्कि दोषियों पर आर्थिक दंड भी लगाया। हत्या के लिए दोनों पर 50,000 रुपये और सबूत मिटाने के प्रयास के लिए 20,000 रुपये का जुर्माना लगाया गया था। करीब 13 महीने तक चले इस मुकदमे में कुल 126 सुनवाई हुई थीं। दोषियों को भारतीय न्याय संहिता की धारा 103(1) के तहत हत्या और धारा 238(ए) के तहत सबूत नष्ट करने का दोषी पाया गया था।
सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष के वकील के.के. चौबे ने बताया कि जज ने सजा सुनाते समय महाभारत का संदर्भ देते हुए यह स्पष्ट किया था कि अपराध की गंभीरता के हिसाब से ही सजा मिलनी चाहिए। इस केस में पीड़ित की मां रेनू राजपूत ने दोषियों के लिए फांसी की मांग की थी, वहीं चौंकाने वाली बात यह रही कि मुस्कान रस्तोगी के माता-पिता ने भी बयान दिया था कि उन्हें अपनी बेटी को मिलने वाली मौत की सजा पर कोई आपत्ति नहीं है। अब देखना यह होगा कि इलाहाबाद हाई कोर्ट इस मामले में क्या फैसला सुनाता है।