2027 चुनाव की तैयारी: यूपी में भाजपा का 'लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ' अभियान शुरू
2027 यूपी विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा ने 'लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ' अभियान शुरू किया है। जानें क्या है पूरी रणनीति।

उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनावों की बिसात अभी से बिछनी शुरू हो गई है। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने राज्यव्यापी स्तर पर 'लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ' अभियान का आगाज कर दिया है। इस मुहिम के जरिए पार्टी न केवल अपने जमीनी कार्यकर्ताओं में जोश भरना चाहती है, बल्कि विपक्ष और 'INDIA' गठबंधन द्वारा चुनाव आयोग और वोटिंग प्रक्रिया पर उठाए जा रहे सवालों का करारा जवाब भी देना चाहती है।
भाजपा का मानना है कि विपक्ष 'वोट चोरी' जैसे भ्रामक नैरेटिव फैलाकर जनता को गुमराह करने की कोशिश कर रहा है। इसी के विरोध में और अपनी संगठनात्मक पकड़ को और मजबूत करने के लिए यह बड़ा अभियान चलाया जा रहा है। इस पूरे कार्यक्रम की रूपरेखा राज्य प्रभारी विनोद तावड़े, प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी और संगठनात्मक महासचिव धर्मपाल सिंह ने तैयार की है।
प्रदेश के छह क्षेत्रों में गूंजेगा नारा, दिग्गजों ने संभाली कमान
यह अभियान 3 नवंबर से 5 नवंबर 2026 के बीच राज्य के सभी छह संगठनात्मक क्षेत्रों में चलाया जा रहा है। पार्टी ने लक्ष्य रखा है कि हर मार्च में कम से कम 25,000 कार्यकर्ता हिस्सा लें। अभियान की शुरुआत धमाकेदार रही:
- लखनऊ: 3 नवंबर को केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने अवध क्षेत्र की कमान संभालते हुए लोक भवन से परिवर्तन चौक तक विशाल जुलूस का नेतृत्व किया।
- बरेली: इसी दिन ब्रज क्षेत्र में केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य ने कार्यकर्ताओं का जोश बढ़ाया।
- 4 नवंबर का शेड्यूल: गोरखपुर में नितिन नबीन, प्रयागराज (काशी क्षेत्र) में केशव प्रसाद मौर्य और कानपुर में डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक मार्च का नेतृत्व करेंगे।
- 5 नवंबर का समापन: अभियान के आखिरी दिन मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ गाजियाबाद में पश्चिमी क्षेत्र के मार्च का नेतृत्व करेंगे।
सिर्फ रैलियों और मार्च तक ही यह अभियान सीमित नहीं है। भाजपा विभिन्न विधानसभा क्षेत्रों में 'नागरिक गोष्ठियां' भी आयोजित कर रही है। इन बैठकों में विशेष गहन संशोधन (SIR) और मतदाता सूचियों की सटीकता जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा की जा रही है, ताकि चुनाव से पहले वोटर लिस्ट को लेकर कोई खामी न रहे।