बिजनौर पटाखा फैक्ट्री धमाका: 16 दिन बाद कोर्ट में सरेंडर कर गया मुख्य आरोपी खुर्शीद

बिजनौर के वाजिदपुर गांव के पास हुए भीषण पटाखा फैक्ट्री धमाके ने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया था। इस दर्दनाक हादसे में दो मासूम भाइयों की जान चली गई थी। इस मामले में फरार चल रहा मुख्य आरोपी खुर्शीद, जिसे 'पव्वा' के नाम से भी जाना जाता है, आखिरकार 16 दिनों की लुका-छिपी के बाद अदालत के सामने सरेंडर कर गया है। कोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए खुर्शीद को तुरंत जेल भेजने का आदेश दे दिया है।
यह पूरा मामला शेरकोट थाना क्षेत्र के अंतर्गत आता है, जहां एक पुरानी और बंद पड़ी ईंट भट्टी के पास अवैध रूप से पटाखों का निर्माण किया जा रहा था। 20 सितंबर 2026 को यहां एक जोरदार धमाका हुआ। उस वक्त 16 साल का रोहित और उसका छोटा भाई रोहन (उम्र 12-14 वर्ष) पास में ही घास काट रहे थे। धमाका इतना शक्तिशाली था कि दोनों गंभीर रूप से घायल हो गए। रोहन ने 25 सितंबर को दम तोड़ दिया, जबकि रोहित ने 12 दिनों तक जिंदगी और मौत के बीच जंग लड़ने के बाद 2 अक्टूबर को अंतिम सांस ली।
अवैध कारोबार का बड़ा नेटवर्क उजागर
पुलिस की जांच में इस हादसे के पीछे एक बड़े और खतरनाक नेटवर्क का खुलासा हुआ है। एएसपी ईस्ट अमित किशोर श्रीवास्तव और एसपी बिजनौर के.के. बिश्नोई की देखरेख में हुई जांच में पता चला कि ये फैक्ट्रियां कागजों पर तो छोटे लाइसेंस रखती थीं, लेकिन असल में यहां भारी मात्रा में विस्फोटक जमा किया गया था। पुलिस को छापेमारी के दौरान 1,237 किलो कच्चा विस्फोटक और 3,959 किलो तैयार 'सुतली बम' मिले हैं। हैरानी की बात यह है कि इन अवैध पटाखों की सप्लाई महाराष्ट्र और तमिलनाडु जैसे दूरदराज के राज्यों तक की जा रही थी।
इस मामले में पुलिस पहले ही फैक्ट्री मालिक मुकेश रघुवंशी को 24 सितंबर को गिरफ्तार कर चुकी थी। इसके अलावा, पुलिस ने चक्रपुरी/हेमपुर दीपा इलाके में 'बजरंग फायर वर्क्स' पर छापा मारकर यूसुफ (उर्फ मुल्ला बारूद) और गुफरान अंसारी को भी गिरफ्तार किया था, जहां से 1,200 किलो से ज्यादा विस्फोटक बरामद हुआ था। फिलहाल, प्रशासन ने वाजिदपुर धमाका स्थल और संबंधित फैक्ट्रियों को सील कर दिया है और कानूनी कार्रवाई जारी है।