बाराबंकी: वक्फ संपत्ति की कथित अवैध बिक्री पर बवाल, प्रशासन से जांच की मांग
बाराबंकी के बेगमगंज में वक्फ संपत्ति की कथित अवैध बिक्री को लेकर विवाद शुरू हो गया है। केयरटेकर ने डीएम और एसपी से जांच की मांग की है।

उत्तर प्रदेश के बाराबंकी जिले के बेगमगंज इलाके में वक्फ संपत्ति की कथित तौर पर अवैध बिक्री और रजिस्ट्री का मामला सामने आया है। इस विवाद ने अब तूल पकड़ लिया है, जिसके बाद वक्फ संपत्ति के केयरटेकर ने जिला प्रशासन और पुलिस से हस्तक्षेप की गुहार लगाई है। आरोप है कि नवाब अमजद अली खान की वक्फ संपत्ति के एक हिस्से को नियमों को ताक पर रखकर बेच दिया गया है।
पूरा मामला बेगमगंज स्थित गाटा संख्या 152 की 'बैरिस्टर सरदार हुसैन बिल्डिंग' से जुड़ा है। वक्फ संपत्ति के केयरटेकर सरवर अली रिज़वी ने जिला मजिस्ट्रेट (DM) और पुलिस अधीक्षक (SP) को औपचारिक शिकायत सौंपी है। रिज़वी का दावा है कि इस संपत्ति के लिए 14 जून 1924 को एक 99 साल का लीज समझौता हुआ था, जिसकी अवधि 14 जून 2023 को समाप्त हो चुकी है। हालांकि, लीज नवीनीकरण के लिए उत्तर प्रदेश शिया सेंट्रल वक्फ बोर्ड में आवेदन किया गया था, लेकिन अभी तक इसकी कोई अंतिम मंजूरी नहीं मिली है।
रजिस्ट्री और दस्तावेजों पर उठे सवाल
विवाद की मुख्य जड़ 27 मार्च 2025 को निष्पादित एक प्रॉपर्टी डीड है। शिकायत के अनुसार, लगभग 659 वर्ग फुट (61.22 वर्ग मीटर) जमीन को 27,94,000 रुपये में ट्रांसफर किया गया है। इस सौदे में मोहम्मद हनीफ और हाफिज मोहम्मद हलीम को विक्रेता और आदिल अहमद खान, जावेद नसीम खान व आमिर नईम खान को खरीदार बताया गया है। केयरटेकर ने सवाल उठाया है कि क्या इस रजिस्ट्री से पहले वक्फ बोर्ड ने कोई अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) या मंजूरी दी थी?
सरवर अली रिज़वी ने जिलाधिकारी से मांग की है कि राजस्व विभाग और संबंधित अधिकारियों की एक संयुक्त टीम बनाकर गाटा संख्या 152 की पैमाइश कराई जाए। उन्होंने राजस्व रिकॉर्ड, वक्फ रिकॉर्ड और उमीद (UMEED) पोर्टल के दस्तावेजों का मिलान करने तथा मौके पर किसी भी अवैध निर्माण या तोड़फोड़ की जांच करने का अनुरोध किया है।
वहीं, पुलिस अधीक्षक को भेजी गई शिकायत में दस्तावेजों के साथ छेड़छाड़ और धोखाधड़ी की आशंका जताई गई है। शिकायतकर्ता ने पुलिस से मांग की है कि इस मामले में शामिल लोगों से पूछताछ की जाए और यदि कोई आपराधिक कृत्य पाया जाता है, तो उनके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए। फिलहाल जिला प्रशासन की ओर से इस मामले में आधिकारिक पुष्टि का इंतजार है।