बाराबंकी: श्रीराम कथा में अतुल कृष्ण भारद्वाज ने शिव-सती के प्रसंग से सिखाया सुखी वैवाहिक जीवन का मंत्र
बाराबंकी में श्रीराम कथा के दौरान अतुल कृष्ण भारद्वाज महाराज ने शिव-सती के प्रसंग से सिखाए गृहस्थ जीवन और आपसी प्रेम के गुर।

बाराबंकी के रामनगर में आयोजित श्रीराम कथा के दूसरे दिन श्रद्धालुओं को भक्ति और जीवन प्रबंधन का अनूठा संगम देखने को मिला। वृंदावन से पधारे प्रख्यात कथावाचक अतुल कृष्ण भारद्वाज महाराज ने भगवान शिव और माता सती के प्रसंग के जरिए गृहस्थ जीवन की बारीकियों को समझाया। बुधवार दोपहर 3 बजे से शाम 7 बजे तक चली इस कथा में महाराज ने बताया कि कैसे प्रेम, विश्वास और सम्मान के जरिए एक घर को स्वर्ग बनाया जा सकता है।
पारिवारिक कलह दूर करने के लिए धैर्य और समझ जरूरी
कथा के दौरान महाराज ने वर्तमान समय में बढ़ते पारिवारिक विवादों पर गहरी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि आज माता-पिता, भाई-बहन और बच्चों के बीच आपसी मनमुटाव बढ़ रहा है, जिसे केवल धैर्य और आपसी समझ से ही सुलझाया जा सकता है। उन्होंने जोर देकर कहा कि वैवाहिक जीवन में जिद के बजाय स्नेह को प्राथमिकता देनी चाहिए। शिव और सती के संबंधों का उदाहरण देते हुए उन्होंने बताया कि किसी भी रिश्ते की बुनियाद सम्मान और गरिमा पर टिकी होती है।
महाराज ने केवल पारिवारिक रिश्तों ही नहीं, बल्कि सामाजिक शिष्टाचार पर भी बात की। उन्होंने आगाह किया कि बिना निमंत्रण के किसी समारोह में जाना अपमान का कारण बन सकता है, इसलिए व्यक्ति को विवेक से काम लेना चाहिए। साथ ही, उन्होंने स्वर्ग और नर्क की अवधारणा को कर्मों से जोड़ते हुए कहा कि भौतिक सुखों और धन की अंधी दौड़ इंसान को भ्रष्टाचार और दुखों की ओर ले जाती है।
उन्होंने श्रद्धालुओं को प्रेरित करते हुए कहा कि सच्चा वैराग्य परिवार को छोड़कर भागना नहीं है, बल्कि अपने घर को ही प्रेम और संस्कारों के जरिए एक पवित्र मंदिर में बदल देना है। कार्यक्रम के अंत में मंगला आरती के साथ कथा का समापन हुआ। इस अवसर पर एसडीएम आकांक्षा गुप्ता, रानी मृणालिनी सिंह, चेयरमैन जगदीश गुप्ता सहित रामशरण पाठक, रविकांत पांडेय और बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे। पूरे कार्यक्रम का समन्वय 'नारद संवाद' के संपादक कृष्ण कुमार शुक्ला ने किया।