बाराबंकी: राम कथा में वनवास प्रसंग सुनकर भावुक हुए श्रद्धालु, आंखों से छलके आंसू

बाराबंकी के रामनगर में आयोजित राम कथा के दौरान श्री राम के वनवास प्रसंग ने भक्तों की आंखों में आंसू ला दिए। जानिए कथावाचक ने क्या संदेश दिया।

Shubham Singh2 November 20262 min read0 viewsउत्तर प्रदेश
बाराबंकी: राम कथा में वनवास प्रसंग सुनकर भावुक हुए श्रद्धालु, आंखों से छलके आंसू

उत्तर प्रदेश के बाराबंकी जिले के रामनगर नगर पंचायत स्थित पुरानी तहसील परिसर में आयोजित राम कथा के दौरान एक ऐसा क्षण आया जब पूरा माहौल भक्ति और करुणा से भर गया। कथावाचक अतुल कृष्ण भारद्वाज जब भगवान श्री राम के वनवास प्रसंग का वर्णन कर रहे थे, तब वहां मौजूद श्रद्धालु अपने आंसू नहीं रोक पाए। श्री राम द्वारा पिता के वचन और कुल की मर्यादा रखने के लिए राजपाट त्याग कर वन की ओर प्रस्थान करने की कहानी ने हर किसी के दिल को छू लिया।

त्याग और कर्तव्य की सीख

कथावाचक अतुल कृष्ण भारद्वाज ने इस प्रसंग के माध्यम से समाज को त्याग और समर्पण का संदेश दिया। उन्होंने बताया कि भगवान राम ने अपने सुख-सुविधाओं की चिंता किए बिना परिवार, समाज और राष्ट्र के लिए बलिदान दिया। उन्होंने राजा दशरथ के उदाहरण से बुजुर्गों को प्रेरित किया कि उन्हें समय रहते अपनी जिम्मेदारियां अगली पीढ़ी को सौंप देनी चाहिए ताकि वे आध्यात्मिक शांति की ओर बढ़ सकें।

भारद्वाज ने एक महत्वपूर्ण चेतावनी देते हुए कहा कि शुभ कार्यों में देरी नहीं करनी चाहिए। उन्होंने जिक्र किया कि जब राजा दशरथ ने अयोध्यावासियों के सामने राम के राज्याभिषेक की घोषणा की लेकिन उसे अगले दिन के लिए टाल दिया, तो परिणाम दुखद रहे। उन्होंने श्रद्धालुओं को सिखाया कि जीवन की हर परिस्थिति में श्री राम की तरह प्रसन्न रहना चाहिए।

कथा के दौरान माता कौशल्या के धैर्य और लक्ष्मण जी के अटूट समर्पण की भी चर्चा की गई। भारद्वाज ने कहा कि माता कौशल्या ने पुत्र के वनवास के बाद भी किसी को दोष नहीं दिया और पति के वचन को सर्वोपरि माना। वहीं, लक्ष्मण जी के सेवा भाव को आदर्श बताते हुए कहा कि हर भाई को लक्ष्मण जैसा होना चाहिए।

माता कैकेयी के किरदार पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने बताया कि राम कथा में उनका स्थान अत्यंत महत्वपूर्ण है, क्योंकि उनके फैसलों के कारण ही श्री राम 'मर्यादा पुरुषोत्तम' बने और रामराज्य की स्थापना का मार्ग प्रशस्त हुआ। वहीं माता सीता द्वारा महल के सुखों का त्याग कर पति धर्म निभाना आज भी प्रेरणादायक है।

इस भावुक कर देने वाले आयोजन में व्यापार मंडल के अध्यक्ष रविकांत पांडे, पवन ओझा और गौरीकांत दीक्षित सहित बड़ी संख्या में स्थानीय श्रद्धालु उपस्थित रहे।

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