बाराबंकी: चक्रवाती बारिश ने तबाह की धान की फसल, मुआवजे को लेकर किसानों में आक्रोश

बाराबंकी के रामनगर में चक्रवात अर्नव की बारिश ने धान की फसल बर्बाद कर दी है। किसान अब प्रशासन से उचित मुआवजे की गुहार लगा रहे हैं।

Sushant Singh31 October 20262 min read0 viewsउत्तर प्रदेश
बाराबंकी: चक्रवाती बारिश ने तबाह की धान की फसल, मुआवजे को लेकर किसानों में आक्रोश

उत्तर प्रदेश के बाराबंकी जिले में प्रकृति की मार ने किसानों की कमर तोड़ दी है। चक्रवात अर्नव के कारण हुई भारी बारिश ने रामनगर तहसील के तराई इलाकों में धान की खड़ी फसल को पूरी तरह बर्बाद कर दिया है। अक्टूबर के आखिरी दिनों में हुई मूसलाधार बारिश ने खेतों को तालाब बना दिया, जिससे फसलें जलमग्न होकर सड़ने लगी हैं।

किसानों की हालत इतनी बदतर हो गई है कि वे कर्ज के बोझ तले दबे हुए हैं। लोहटी जय गांव के किसान श्याम मोहन ने अपना दुख साझा करते हुए बताया कि उन्होंने अपनी पत्नी के झुमके गिरवी रखकर 40 हजार रुपये जुटाए थे ताकि 20 बीघा जमीन पर खेती कर सकें। लेकिन अब फसल पानी में डूब चुकी है और दाने सड़ रहे हैं, जिससे उनके पास कर्ज चुकाने का कोई रास्ता नहीं बचा है। यही हाल रामदयाल मिश्रा और झेंगई रावत का है, जिनकी बीघाओं में खड़ी फसल अब महज कचरा बन चुकी है और वे एक दाना भी नहीं निकाल पाए हैं।

प्रशासनिक लापरवाही और मुआवजे की जंग

फसल की बर्बादी के बाद अब किसान प्रशासनिक उदासीनता से जूझ रहे हैं। किसानों का आरोप है कि तहसील प्रशासन नुकसान का सही सर्वे नहीं कर रहा है। जब किसान मुआवजे के लिए आवेदन करने पहुंचे, तो उन्हें बताया गया कि ऑनलाइन पोर्टल बंद हो चुका है। इस मजबूरी में किसान अब अपने आधार कार्ड, खतौनी और बैंक पासबुक की प्रतियां हाथ से लिखकर तहसील कार्यालय में जमा कर रहे हैं।

रामशंकर त्रिवेदी, आनंद शुक्ला और अवधेश अवस्थी समेत दर्जनों किसानों ने एकजुट होकर मांग की है कि नुकसान का निष्पक्ष आकलन किया जाए और मुआवजे की राशि बढ़ाई जाए। साथ ही, उन्होंने ऑनलाइन पोर्टल को फिर से खोलने की मांग की है ताकि कोई भी पीड़ित किसान छूट न जाए। इस पूरे मामले पर तहसीलदार विपुल सिंह ने आश्वासन दिया है कि मामले की जांच कराई जाएगी और उचित कदम उठाए जाएंगे।

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