बाराबंकी: यूकेलिप्टस पेड़ों की कटाई पर मचा घमासान, राजस्व टीम की जांच में खुला राज

उत्तर प्रदेश के बाराबंकी जिले के रामनगर क्षेत्र स्थित मझहौनी गांव में यूकेलिप्टस के पेड़ों की कटाई को लेकर छिड़ा एक बड़ा विवाद अब शांत हो गया है। राजस्व टीम की गहन जांच और पैमाइश के बाद यह साफ हो गया है कि जिस जमीन पर पेड़ों की कटाई हो रही थी, वह वास्तव में किसान की ही थी। इस बाराबंकी जमीन विवाद जांच ने यह साबित कर दिया कि बिना कागजी सबूतों के लगाए गए दावे अक्सर गलत होते हैं।
पूरा मामला 7 अक्टूबर का है, जब बालकराम नाम के एक किसान अपनी जमीन पर लगे यूकेलिप्टस के पेड़ों की कटाई कर रहे थे। इसी दौरान अनीता और शीला नामक दो महिलाओं ने वहां पहुंचकर काम रुकवा दिया और दावा किया कि उन पेड़ों पर उनका मालिकाना हक है। यह विवाद इतना बढ़ गया कि मामला पहले पुलिस चौकी, फिर थाने और अंत में राजस्व विभाग तक जा पहुंचा।
राजस्व टीम की पैमाइश से खुली पोल
मामले की गंभीरता को देखते हुए क्षेत्रीय लेखपाल आदित्य वर्मा और राजस्व निरीक्षक जयशंकर उपाध्याय ने बुधवार को मौके पर पहुंचकर जमीन की पैमाइश की। जांच के दौरान यह पाया गया कि जिस प्लॉट नंबर पर पेड़ काटे जा रहे थे, वह कानूनी तौर पर बालकराम की ही मिल्कियत है। वहीं, जिन महिलाओं ने दावा किया था, उनकी बताई गई जमीन दरअसल ग्राम समाज की निकली। जांच में यह स्पष्ट हो गया कि अनीता और शीला का उस विवादित स्थल से कोई कानूनी संबंध नहीं था।
प्रशासन की इस निष्पक्ष कार्रवाई की स्थानीय स्तर पर काफी सराहना हो रही है। इस घटना ने यह सबक दिया है कि जमीन से जुड़े विवादों को केवल आरोपों के आधार पर नहीं, बल्कि आधिकारिक रिकॉर्ड और भौतिक सर्वेक्षण के जरिए सुलझाना चाहिए। अब चर्चा यह भी है कि झूठे दावे कर किसान का काम रुकवाने और उसे आर्थिक नुकसान पहुंचाने वालों के खिलाफ नियमों के मुताबिक कार्रवाई की जाए, ताकि भविष्य में कोई भी शिकायत प्रक्रिया का गलत इस्तेमाल न कर सके।