बाराबंकी: जननी-जनक उत्सव में 175 बुजुर्गों का सम्मान, बच्चों ने ली सेवा की शपथ

बाराबंकी: जननी-जनक उत्सव में 175 बुजुर्गों का सम्मान, बच्चों ने ली सेवा की शपथ

उत्तर प्रदेश के बाराबंकी जिले में रिश्तों की गर्माहट और संस्कारों का एक अद्भुत संगम देखने को मिला। चंदवल के रामसनेहीघाट स्थित चाइल्ड फ्रेंडली स्कूल कैंपस में मंगलवार को 20वां 'जननी-जनक उत्सव' और वरिष्ठ नागरिक सम्मान समारोह आयोजित किया गया। इस भावुक कार्यक्रम का आयोजन 'बेसिक उत्थान एवं ग्रामीण सेवा संस्थान' (बिरजू संस्थान) द्वारा किया गया, जहां जिले के विभिन्न क्षेत्रों से आए 175 बुजुर्गों को सम्मानित कर उनके प्रति सम्मान व्यक्त किया गया।

इस आयोजन की सबसे खास बात यह रही कि यहां मौजूद बेटों, बेटियों और बहुओं ने अपने माता-पिता का पारंपरिक तरीके से पूजन किया। उन्होंने न केवल अपने बुजुर्गों के पैर छुए, बल्कि जीवन भर उनकी सेवा करने और उन्हें पूरा सम्मान देने का संकल्प भी लिया। कार्यक्रम की अध्यक्षता राष्ट्रपति पुरस्कार विजेता और अवधी साहित्यकार डॉ. रामबहादुर मिश्रा ने की।

संस्कारों की अहमियत और बदलती जीवनशैली

संस्थान के अध्यक्ष रतनेश कुमार ने इस मौके पर समाज को एक जरूरी संदेश दिया। उन्होंने कहा कि माता-पिता जीवन के पहले शिक्षक होते हैं और उनकी सेवा करना केवल एक दिन का दिखावा नहीं, बल्कि जीवनभर का संस्कार होना चाहिए। उन्होंने चिंता जताई कि बदलती जीवनशैली के कारण बुजुर्गों में अकेलापन बढ़ रहा है, ऐसे में इस तरह के आयोजन नई पीढ़ी को अपनी जड़ों और पारंपरिक मूल्यों से जोड़ने का काम करते हैं।

कार्यक्रम में मौजूद वरिष्ठ नेत्र सर्जन डॉ. विवेक वर्मा ने कहा कि बुजुर्गों का सम्मान ही परिवार की असली मजबूती है। वहीं, शिक्षा विभाग की पूर्व उपनिदेशक वसुमती अग्निहोत्री ने माता-पिता को परिवार की सबसे बड़ी पूंजी बताया। डॉ. अर्जुन पांडे सहित अन्य वक्ताओं ने भी जोर देकर कहा कि माता-पिता की सेवा से बढ़कर दुनिया में कोई दूसरी पूजा नहीं है।

इस गरिमामय समारोह में पूनम सिंह, अनीता प्रताप, शैलेंद्र सिंह, डॉ. विनय दास, बाबूलाल वर्मा, डॉ. शशि कुमार अवस्थी, डॉ. अंबरीश amber और हुमायूं नईम खान समेत शिक्षा, चिकित्सा और सामाजिक क्षेत्र की कई हस्तियां शामिल हुईं। कार्यक्रम के समापन पर एक विशाल भंडारे का आयोजन किया गया, जिसमें करीब 1,000 लोगों ने प्रसाद ग्रहण किया।

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