बाराबंकी ड्रग्स केस: ट्रेन से तस्करी कर रहे दो दोषियों को 10 साल की जेल

उत्तर प्रदेश के बाराबंकी में कोर्ट ने ड्रग्स तस्करी के एक पुराने मामले में बड़ा फैसला सुनाया है। 2017 में हुए एक ड्रग्स जब्ती मामले में अदालत ने दो तस्करों को दोषी करार देते हुए उन्हें 10 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) ने इस सजा की पुष्टि की है।
यह पूरा मामला मई 2017 का है, जब एनसीबी की लखनऊ जोनल यूनिट ने बाराबंकी रेलवे स्टेशन पर एक बड़ी कार्रवाई की थी। उस समय अवध असम एक्सप्रेस से उतर रहे दो व्यक्तियों, जिनकी पहचान शकील और रामप्यारी के रूप में हुई, के पास से काले बैग बरामद हुए थे। जब इन बैगों की तलाशी ली गई, तो उनमें से 340 ग्राम हेरोइन और 160 ग्राम गांजा मिला।
नागालैंड से लाया गया था नशीला पदार्थ
एनसीबी की जांच में यह खुलासा हुआ था कि नशे की यह खेप नागालैंड के डिमापुर से बाराबंकी लाई गई थी। अभियोजन पक्ष ने अदालत में दलील दी कि ड्रग तस्करी समाज के लिए बेहद खतरनाक है और युवाओं को बर्बाद करती है, इसलिए दोषियों को कड़ी से कड़ी सजा मिलनी चाहिए।
बाराबंकी के Additional District and Sessions Judge ने सभी सबूतों और गवाहों के बयानों को परखने के बाद दोनों आरोपियों को दोषी पाया और उन्हें 10 साल की सख्त जेल की सजा सुनाई। यह फैसला सोमवार (19 अक्टूबर) को सुनाया गया, जिसकी जानकारी एनसीबी ने बुधवार को एक प्रेस विज्ञप्ति के जरिए दी।
गौरतलब है कि एनसीबी लगातार ड्रग्स नेटवर्क को ध्वस्त करने में जुटी है। इसी तरह की एक बड़ी कार्रवाई पटना जोनल यूनिट ने भी की थी, जहां बिहार में 5.250 किलो अफीम की तस्करी के मामले में प्रमोद प्रसाद और बिकेश कुमार गुप्ता को भी 10 साल की जेल और जुर्माने की सजा सुनाई गई थी।