बाराबंकी: दिव्यांग की झोपड़ी ढहाकर बेघर किया, न्याय के लिए दर-दर भटक रहा पीड़ित

उत्तर प्रदेश के बाराबंकी जिले से एक हृदयविदारक मामला सामने आया है, जहां एक दिव्यांग व्यक्ति को अपनी ही जमीन पर घर बनाने से रोका जा रहा है। लोनी कटरा थाना क्षेत्र के मकानपुर गांव के रहने वाले गोपीचंद्र कश्यप का आरोप है कि स्थानीय दबंगों ने मिलकर उनकी झोपड़ी को जबरन ध्वस्त कर दिया, जिससे वह अब बेघर हो चुके हैं।
पीड़ित गोपीचंद्र कश्यप के मुताबिक, वह अपनी निजी जमीन पर एक स्थायी घर बनाना चाहते थे, लेकिन इलाके के रसूखदार लोगों ने इसमें अड़ंगा डाल दिया। बात सिर्फ रुकावट तक नहीं रही, बल्कि दबंगों ने उनकी झोपड़ी तक को तोड़ दिया। शारीरिक रूप से अक्षम होने के कारण वह इन लोगों का मुकाबला नहीं कर पाए और अब खुले आसमान के नीचे रहने को मजबूर हैं।
प्रशासनिक अनदेखी से बढ़ा आक्रोश
न्याय की उम्मीद में गोपीचंद्र कश्यप ने स्थानीय पुलिस स्टेशन से लेकर तहसील और पुलिस अधीक्षक (SP) कार्यालय तक के चक्कर लगाए हैं। उनका दावा है कि बार-बार गुहार लगाने और शिकायतें दर्ज कराने के बावजूद अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। सरकारी दफ्तरों की इस उदासीनता ने पीड़ित की मुश्किलों को और बढ़ा दिया है।
गौरतलब है कि बाराबंकी जिला प्रशासन द्वारा जनता की समस्याओं के निपटारे के लिए 'समाधान दिवस' जैसे कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं, लेकिन गोपीचंद्र जैसे लोगों के लिए ये प्रयास कागजी साबित हो रहे हैं। लोनी कटरा क्षेत्र में जमीन कब्जाने और अतिक्रमण के मामले अक्सर सामने आते रहते हैं, जिनमें प्रशासनिक देरी के कारण पीड़ितों को लंबे समय तक इंतजार करना पड़ता है।
फिलहाल, यह मामला स्थानीय पुलिस और प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है कि आखिर एक दिव्यांग व्यक्ति को अपनी ही जमीन पर हक पाने के लिए इतना संघर्ष क्यों करना पड़ रहा है।