बाराबंकी: चक्रवात अर्नव ने तबाह की धान की फसल, सर्वे में गड़बड़ी पर भड़के किसान
चक्रवात अर्नव की बारिश से बाराबंकी में धान की फसलें तबाह हो गई हैं। सर्वे में गड़बड़ी का आरोप लगाकर किसानों ने तहसील में प्रदर्शन किया।

उत्तर प्रदेश के बाराबंकी जिले में चक्रवात अर्नव का कहर बरपा है, जिससे रामनगर तहसील के तराई इलाकों में खड़ी धान की फसलें पूरी तरह बर्बाद हो गई हैं। भारी बारिश ने किसानों की उम्मीदों पर पानी फेर दिया है, जिससे अब क्षेत्र के अन्नदाता गहरे आर्थिक संकट में घिर गए हैं। 28 अक्टूबर से 31 अक्टूबर के बीच हुई मूसलाधार बारिश ने खेतों को तालाब बना दिया और बची-कुची फसलें भी सड़कर खत्म हो गईं।
फसलों की बर्बादी का दर्द बयां करते हुए लोहाटी जय गांव के किसान श्याम मोहन ने बताया कि उन्होंने अपनी पत्नी के कान के झुमके गिरवी रखकर 40 हजार रुपये जुटाए थे ताकि 20 बीघे में धान की खेती कर सकें। लेकिन अब पूरी फसल नष्ट हो चुकी है, जिससे वे कर्ज चुकाने में असमर्थ हैं और पूरी तरह सरकारी मदद के भरोसे हैं। वहीं, रामदयाल मिश्रा और झेंगई रावत जैसे अन्य किसानों का कहना है कि उनकी मेहनत खेतों में ही सड़ गई और वे एक दाना भी नहीं निकाल पाए।
सर्वे में धांधली का आरोप, तहसील कार्यालय पहुंचे सैकड़ों किसान
नुकसान के बाद अब किसानों का गुस्सा प्रशासन के खिलाफ फूट पड़ा है। किसानों का आरोप है कि तहसील प्रशासन के अधिकारी जमीनी हकीकत जानने के लिए खेतों तक नहीं पहुंचे और बिना मौके पर आए ही सर्वे की बात की जा रही है। किसानों ने यह भी दावा किया कि लेखपालों द्वारा उन्हें बताया गया कि मुआवजे के लिए ऑनलाइन पोर्टल बंद हो चुका है। इसी डर से कि कहीं तकनीकी कारणों से उनका नाम छूट न जाए, सैकड़ों किसान अपने आधार कार्ड, खतौनी और बैंक पासबुक लेकर व्यक्तिगत रूप से तहसील कार्यालय पहुंचने को मजबूर हुए हैं।
रामशंकर त्रिवेदी, आनंद शुक्ला और अवधेश अवस्थी समेत बड़ी संख्या में जुटे किसानों ने मांग की है कि नुकसान का निष्पक्ष सर्वे कराया जाए, मुआवजे की राशि बढ़ाई जाए और पोर्टल को दोबारा खोला जाए ताकि हर पीड़ित किसान को लाभ मिल सके। इस मामले पर रामनगर तहसीलदार विपुल सिंह ने आश्वासन दिया है कि अधिकारियों को भेजकर नुकसान की गहन जांच कराई जाएगी और उचित कार्रवाई की जाएगी।