बांदा: सरकारी मदद का झांसा देकर मेडिकल शॉप कर्मी से 98,633 रुपये की ठगी

उत्तर प्रदेश के बांदा जिले में साइबर अपराधियों ने एक बेहद शातिर तरीके से एक मेडिकल शॉप कर्मी को अपना शिकार बनाया है। सरकारी सहायता दिलाने के नाम पर जालसाजों ने पीड़ित के बैंक खाते से 98,633 रुपये पार कर दिए। यह पूरी घटना गिरवन थाना क्षेत्र के बड़ोखर बुजुर्ग गांव की है, जहां ठगों ने सरकारी विभाग का फर्जी नाम इस्तेमाल कर लोगों को जाल में फंसाया।
मामले की शुरुआत तब हुई जब गांव की आंगनवाड़ी सहायिका आरती को एक अज्ञात व्यक्ति का फोन आया। फोन करने वाले ने खुद को बाल विकास विभाग का अधिकारी बताया और आरती पर पोषण आहार के वितरण में लापरवाही का झूठा आरोप लगाया। जब आरती ने अपनी ड्यूटी सही ढंग से निभाने की बात कही, तो ठग ने 'सत्यापन' के नाम पर गांव की एक गर्भवती महिला प्रेमा का संपर्क नंबर मांगा।
QR कोड के जरिए खाली किया बैंक खाता
नंबर मिलने के बाद जालसाज ने प्रेमा के पति रविकरण से संपर्क किया और उन्हें झांसा दिया कि उनकी पत्नी 12,600 रुपये के सरकारी सहायता पैकेज की हकदार हैं। इस राशि को ट्रांसफर करने के बहाने ठग ने एक ऐसे व्यक्ति का PhonePe QR स्कैनर मांगा, जिसके खाते में नियमित रूप से 10,000 रुपये से अधिक का लेनदेन होता हो।
रविकरण ने इस काम के लिए नीरज निगम का QR स्कैनर साझा कर दिया, जो स्थानीय मेडिकल शॉप पर काम करता है। इसके बाद ठग ने नीरज को एक मैसेज भेजा और उसमें दिए गए निर्देशों के अनुसार एक बटन क्लिक करवाया। जैसे ही बटन दबाया गया, नीरज के खाते से एक के बाद एक ट्रांजेक्शन होने लगे और देखते ही देखते कुल 98,633 रुपये गायब हो गए।
धोखाधड़ी का एहसास होने पर पीड़ित नीरज निगम ने तुरंत साइबर पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई है। पीड़ित ने प्रशासन से मामले की गहन जांच और दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की मांग की है।