आजमगढ़: 2007 के डबल मर्डर केस में बड़ा फैसला, बीजेपी ब्लॉक प्रमुख समेत 8 को उम्रकैद
2007 के डबल मर्डर केस में आजमगढ़ कोर्ट का बड़ा फैसला, बीजेपी ब्लॉक प्रमुख समेत 8 लोगों को उम्रकैद और जुर्माना लगाया गया।

उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ में एक अदालत ने साल 2007 में हुए दोहरे हत्याकांड में ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। कोर्ट ने इस मामले में संलिप्त आठ लोगों को दोषी करार देते हुए उन्हें उम्रकैद की सजा सुनाई है। यह मामला करीब 19 साल पुराना है, जिसमें वर्चस्व की लड़ाई के चलते दो भाइयों की बेरहमी से हत्या कर दी गई थी।
घटना 21 अक्टूबर 2007 की है, जब रानी की सराय थाना क्षेत्र के रुद्री गांव में दशहरे के दौरान भारी तनाव फैल गया था। आपसी विवाद और दबदबे की जंग में हमलावरों ने तालुकदार सिंह और पारसनाथ सिंह नामक दो भाइयों को गोली मार दी थी, जिससे उनकी मौके पर ही मौत हो गई। इस हिंसक झड़प में रामजन्म सिंह के भतीजों, अंकित सिंह और आशीष को भी लाठियों और रॉड से बुरी तरह पीटा गया था।
बीजेपी ब्लॉक प्रमुख भी दोषी, लगाया भारी जुर्माना
अपर सत्र न्यायाधीश कमलापति (कोर्ट नंबर एक) ने इस मामले की सुनवाई की। कोर्ट ने बीजेपी ब्लॉक प्रमुख विपिन सिंह, राजेश सिंह, बलवंत सिंह, चुन्नू उर्फ रणविजय, छोटू उर्फ पंकज, लोकनाथ सिंह और जीवन प्रकाश सिंह समेत कुल आठ लोगों को उम्रकैद की सजा सुनाई है। इसके साथ ही, सभी दोषियों पर 74,000 रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है। मामले के नौवें आरोपी राधेश्याम सिंह की लंबी कानूनी प्रक्रिया के दौरान मौत हो चुकी थी।
वादी पक्ष के वकील विंध्यवासिनी सिंह ने बताया कि इस केस को साबित करने के लिए अभियोजन पक्ष ने 17 गवाह पेश किए। हालांकि, बचाव पक्ष द्वारा हाई कोर्ट से बार-बार स्टे लेने की कोशिशों की वजह से इस मुकदमे में काफी देरी हुई।
दिलचस्प बात यह है कि इसी घटना को लेकर विपिन सिंह ने भी एक क्रॉस-केस दर्ज कराया था। उस मामले में भी कोर्ट ने छह अन्य लोगों को हत्या के प्रयास और मारपीट का दोषी पाया है, जिसमें 22 गवाहों के बयान दर्ज किए गए थे। फैसले के तुरंत बाद सभी दोषियों को हिरासत में लेकर मंडल जेल भेज दिया गया है।