रामपुर जेल से रिहा हो सकते हैं आजम खान और अब्दुल्ला आजम, लेकिन राह अब भी मुश्किल
डबल पैन कार्ड केस में इलाहाबाद हाईकोर्ट से जमानत मिलने के बाद आजम खान और उनके बेटे की रिहाई की उम्मीद है, लेकिन कानूनी अड़चनें अभी बाकी हैं।

समाजवादी पार्टी के कद्दावर नेता आजम खान और उनके बेटे अब्दुल्ला आजम के लिए राहत की खबर आई है। डबल पैन कार्ड मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट से जमानत मिलने के बाद, उम्मीद जताई जा रही है कि शनिवार, 31 अक्टूबर 2026 को उन्हें रामपुर जेल से रिहा कर दिया जाएगा। कानूनी औपचारिकताएं पूरी होने के बाद उनकी रिहाई का रास्ता साफ हुआ है, हालांकि बीते शुक्रवार को जमानत की पुष्टि और सत्यापन की प्रक्रिया पूरी न होने के कारण उन्हें जेल में ही रुकना पड़ा था।
इस मामले की पृष्ठभूमि देखें तो जस्टिस समित गोपाल ने दोनों को जमानत देते हुए उनकी सजा निलंबित कर दी थी। लेकिन यहां एक पेंच यह है कि अदालत ने उनकी सजा (conviction) पर रोक लगाने से इनकार कर दिया है, जिसका सीधा असर उनकी चुनावी पात्रता पर पड़ सकता है। गौरतलब है कि नवंबर 2025 में निचली अदालत ने इस मामले में सात साल की सजा सुनाई थी, जिसे बाद में सत्र न्यायालय ने आजम खान के लिए बढ़ाकर 10 साल कर दिया था।
रिहाई के बीच कानूनी चुनौतियों का पहाड़
भले ही पैन कार्ड मामले में जमानत मिल गई हो, लेकिन आजम खान की मुश्किलें कम नहीं हुई हैं। शनिवार को ही उन्हें दो अलग-अलग मामलों में अदालत में पेश होना है। सुबह 11 बजे गवाहों को डराने के आरोप वाले मामले में एमपी-एमएलए सत्र न्यायालय में सुनवाई होगी, जबकि दोपहर 12 बजे क्वालिटी बार की जमीन पर अवैध कब्जे के मामले में मजिस्ट्रेट ट्रायल कोर्ट में पेशी है।
इतना ही नहीं, प्रवर्तन निदेशालय (ED) भी आजम खान की मुश्किलें बढ़ा रहा है। जौहर यूनिवर्सिटी के निर्माण के दौरान सरकारी फंड के कथित गबन और मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में ED ने उनकी रिमांड मांगी है, जिस पर सोमवार को सुनवाई होनी है। इसके अलावा, शत्रु संपत्ति पर कब्जे, भ्रष्टाचार और जौहर ट्रस्ट के दान में अनियमितताओं जैसे करीब 40 अन्य मामले अभी भी लंबित हैं। अब्दुल्ला आजम की रिहाई भी इस बात पर निर्भर करेगी कि उनके खिलाफ कोई अन्य वारंट या कानूनी कार्यवाही तो बकाया नहीं है। ऐसे में यह देखना दिलचस्प होगा कि इन तमाम कानूनी अड़चनों के बीच वे जेल से बाहर आ पाते हैं या नहीं।