नफरत और डर से लोगों को गुमराह नहीं किया जा सकता, अमेरिका-इजरायल चुनाव से लें सबक: अरशद मदनी
जमीयत उलेमा-ए-हिंद के अध्यक्ष अरशद मदनी ने अमेरिका और इजरायल के चुनाव परिणामों को नफरत और विभाजन की राजनीति के खिलाफ एक सबक बताया है।

जमीयत उलेमा-ए-हिंद के अध्यक्ष मौलाना अरशद मदनी ने अमेरिका और इजरायल के हालिया चुनाव परिणामों को लेकर एक बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा है कि दुनिया के किसी भी कोने में धर्म के नाम पर लोगों को बांटने और नफरत फैलाने वालों के लिए ये नतीजे एक कड़ा संदेश हैं। मौलाना मदनी ने स्पष्ट किया कि राजनीतिक फायदे के लिए डर और पूर्वाग्रह का सहारा लेकर लोगों को हमेशा के लिए गुमराह नहीं किया जा सकता।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर अपनी बात रखते हुए अरशद मदनी ने इन राजनीतिक बदलावों को गाजा में हो रहे अत्याचारों के खिलाफ वैश्विक आक्रोश से जोड़ा। उन्होंने कहा कि गाजा में मासूम बच्चों, महिलाओं और निहत्थे नागरिकों की हत्या, रिहायशी इलाकों की तबाही और भूखमरी के दृश्यों ने पूरी दुनिया के जमीर को झकझोर दिया है। दुनिया भर में हो रहे विरोध प्रदर्शन इस बात का सबूत हैं कि जुल्म चाहे कितना भी ताकतवर क्यों न हो, उसका अंत निश्चित है।
इंसानियत और न्याय की जीत
मौलाना मदनी ने विशेष रूप से मिशिगन (अमेरिका) में हुए सीनेट चुनाव का जिक्र किया, जहां अब्दुल एल-सय्यद ने ऐतिहासिक जीत दर्ज की। उन्होंने बताया कि एल-सय्यद को उनके धार्मिक पहचान के आधार पर निशाना बनाया गया और उन पर जिहाद तथा शरिया कानून लागू करने जैसे गंभीर आरोप लगाए गए। यहाँ तक कि डोनाल्ड ट्रंप ने भी उनके खिलाफ अभियान चलाया और उन्हें अमेरिका की सुरक्षा के लिए खतरा बताया।
मदनी के अनुसार, इन तमाम हमलों के बावजूद अब्दुल एल-सय्यद की जीत यह साबित करती है कि इंसानियत और न्याय, नफरत पर भारी पड़ते हैं। यह परिणाम दर्शाता है कि मतदाता अब डर और पूर्वाग्रहों के प्रभाव में आने को तैयार नहीं हैं।
उन्होंने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि चाहे कोई भी देश हो, जो राजनीतिक ताकतें धर्म को सत्ता हासिल करने का औजार बनाती हैं और समाज में विभाजन पैदा करती हैं, उन्हें इन परिणामों से सबक लेना चाहिए। उन्होंने इतिहास का हवाला देते हुए कहा कि अन्याय और दमन पर आधारित शासन कभी स्थायी नहीं होता। सरकारें आती-जाती रहती हैं, लेकिन सच्चाई, इंसानियत और न्याय की आवाज को कभी भी हमेशा के लिए खामोश नहीं किया जा सकता।