यूपी के 15 जिलों में लगे सपा विरोधी पोस्टर, माफियाओं के साथ दिखी अखिलेश की तस्वीर
उत्तर प्रदेश के 15 जिलों में अखिलेश यादव और सपा के खिलाफ पोस्टर लगे हैं, जिनमें माफियाओं के साथ उनकी तस्वीरें और गंभीर आरोप लगाए गए हैं।

उत्तर प्रदेश की सियासत में एक बार फिर उबाल आ गया है। राज्य के 15 अलग-अलग जिलों में समाजवादी पार्टी (सपा) और उसके अध्यक्ष अखिलेश यादव को निशाना बनाते हुए पोस्टर लगाए गए हैं। इन पोस्टरों ने न केवल राजनीतिक हलकों में चर्चा छेड़ दी है, बल्कि जनता के बीच भी यह चर्चा का विषय बन गए हैं। लखनऊ के नेशनल पीजी कॉलेज चौराहे से लेकर वाराणसी, गाजीपुर, आजमगढ़, बलिया, मऊ, बस्ती, हरदोई और सीतापुर जैसे प्रमुख इलाकों में ये पोस्टर चस्पा किए गए हैं।
इन पोस्टरों में अखिलेश यादव की तस्वीरों के साथ अतीक अहमद, मुख्तार अंसारी और आजम खान जैसे विवादित चेहरों को जगह दी गई है। पोस्टरों में लिखे नारे सीधे तौर पर सपा पर हमला करते नजर आ रहे हैं। इनमें "सपाइयों का क्या भरोसा, चाय-समोसा, रस मलाई, सारे माफिया अपने भाई" और "दाल, चावल और अचार, पार्टी मतलब एक परिवार" जैसे जुमलों का इस्तेमाल किया गया है, जिसके जरिए पार्टी पर माफियाओं को संरक्षण देने और परिवारवाद चलाने का आरोप लगाया गया है।
पुराने विवादों और भर्ती घोटालों का जिक्र
सिर्फ माफियाओं से संबंध ही नहीं, बल्कि इन पोस्टरों में सपा की पिछली सरकार के दौरान हुए फैसलों पर भी सवाल उठाए गए हैं। इसमें 2013 की यूपीपीसीएस (UPPCS) भर्ती प्रक्रिया में जातिवाद के आधार पर नियुक्तियां करने के आरोप लगाए गए हैं। साथ ही, मुजफ्फरनगर दंगों, इफ्तार पार्टियों के आयोजन और कब्रिस्तान की चारदीवारी के लिए खर्च किए गए सरकारी बजट का भी जिक्र किया गया है।
यह पूरा घटनाक्रम 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों से पहले की राजनीतिक घेराबंदी माना जा रहा है। गौरतलब है कि हाल ही में 23 अक्टूबर 2026 को अखिलेश यादव ने रामपुर जेल में आजम खान से मुलाकात की थी और साफ किया था कि खान पार्टी का अहम हिस्सा हैं। उस दौरान उन्होंने भाजपा सरकार पर जौहर यूनिवर्सिटी को नष्ट करने की साजिश रचने का आरोप भी लगाया था। इससे ठीक पहले 22 अक्टूबर को आगरा में 'योगी यूथ ब्रिगेड' ने भी विपक्ष और अखिलेश यादव के खिलाफ पोस्टर लगाकर माहौल गरमाया था।