अमेठी में पशु चिकित्सा सेवाओं का बुरा हाल, 28 डॉक्टरों के पद खाली होने से पशुपालक परेशान
अमेठी में 5 लाख पशुओं के लिए सिर्फ 12 डॉक्टर। कई पदों के खाली होने से पशुपालकों को झोलाछाप डॉक्टरों का सहारा लेना पड़ रहा है।

उत्तर प्रदेश के अमेठी जिले में पशु स्वास्थ्य सेवाएं इस समय गहरे संकट से गुजर रही हैं। जिले के करीब पांच लाख पशुओं की देखभाल की जिम्मेदारी महज 12 डॉक्टरों के कंधों पर है। हालत यह है कि पशु चिकित्सा विभाग में डॉक्टरों और सहायक कर्मचारियों की भारी कमी के कारण पशुपालकों को अपने बेजुबान जानवरों के इलाज के लिए दर-दर भटकना पड़ रहा है।
आंकड़ों पर नजर डालें तो जिले में पशु चिकित्सा सर्जनों के 28 पद खाली पड़े हैं। हैरानी की बात यह है कि जो डॉक्टर तैनात हैं, उनमें से भी कई अपनी ड्यूटी छोड़कर सरकारी कार्यालयों और निदेशालयों में अटैचमेंट पर काम कर रहे हैं, जबकि उनकी सैलरी जिले से ही जा रही है। संग्रामपुर के डॉ. प्रदीप पांडे, गौरीगंज की डॉ. नीति मिश्रा, भतुआ की डॉ. गीता पटेल और जगदीशपुर के एक डॉक्टर अन्य सरकारी विभागों और गोसेवा आयोग में कार्यरत हैं। इसके अलावा, डॉ. शिव ओम गंगवार वर्तमान में निलंबित हैं, जिससे फील्ड पर डॉक्टरों की संख्या और भी कम हो गई है।
झोलाछाप डॉक्टरों के भरोसे पशुओं की जान
सिर्फ डॉक्टर ही नहीं, बल्कि सपोर्ट स्टाफ की स्थिति भी बदतर है। पशु चिकित्सा फार्मासिस्ट के 28 स्वीकृत पदों में से केवल एक व्यक्ति ही कार्यरत है। वहीं, पशुपालन प्रसार अधिकारियों के 43 पदों में से 32 पद खाली पड़े हैं। इस कमी का सबसे ज्यादा असर जिले के तीन आकांक्षी ब्लॉकों—जमो, जगदीशपुर और बाजारशुकुल में दिख रहा है, जहां एक भी सरकारी पशु चिकित्सक तैनात नहीं है।
सरकारी डॉक्टरों की अनुपलब्धता के कारण इन क्षेत्रों के पशुपालक मजबूरन झोलाछाप और अप्रशिक्षित लोगों से इलाज करा रहे हैं। गलत इलाज की वजह से कई बार पशुओं की स्थिति और बिगड़ जाती है, जिससे किसानों को भारी आर्थिक नुकसान झेलना पड़ता है। स्थानीय पशुपालकों का कहना है कि अगर विभाग समय रहते रिक्त पदों को भरता और अटैचमेंट पर गए डॉक्टरों को वापस बुलाता, तो उन्हें यह मुसीबत नहीं झेलनी पड़ती। फिलहाल, पांच लाख पशुओं की चिकित्सा व्यवस्था इन सीमित संसाधनों के भरोसे चल रही है और रिक्त पदों को भरने की कोई स्पष्ट समयसीमा सामने नहीं आई है।